ढाका में हिंसा भड़की: डेली स्टार के दफ्तर पर हमला, 25 पत्रकार सुरक्षित निकाले गए
Dhaka (Bangladesh): बांग्लादेश की राजधानी ढाका में राजनीतिक तनाव और सड़क पर उबाल थमने के बजाय और तेज़ हो गया है। इसी बीच प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला सामने आया है। देश के प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी अख़बार डेली स्टार के दफ्तर पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया। हालात बिगड़ते देख सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार्यालय में मौजूद 25 पत्रकारों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने अख़बार कार्यालय के आसपास तोड़फोड़ की और डर का माहौल बनाने की कोशिश की। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मीडिया संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला बताया है।
जुलाई आंदोलन के नेता की मौत से भड़का जनाक्रोश
इस हिंसा की पृष्ठभूमि में जुलाई आंदोलन के प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत को अहम कारण माना जा रहा है। हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह सिर में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल थे और छह दिनों तक ज़िंदगी और मौत से जूझते रहे।
उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका समेत पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए, जो कहीं-कहीं हिंसक रूप भी ले रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादी को जानबूझकर निशाना बनाया गया और दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है।
अंतरिम सरकार का बयान, राजकीय शोक की घोषणा
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने घटना पर दुख जताते हुए एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि हादी की मौत और हिंसा की घटनाओं में शामिल दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
मीडिया स्वतंत्रता पर मंडराता खतरा
डेली स्टार के दफ्तर पर हमला केवल एक अख़बार पर हमला नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर खतरे का संकेत माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय पत्रकार संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
फिलहाल ढाका में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते जनाक्रोश ने बांग्लादेश की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।








