‘गाँव की गूगल’ बनीं पापिया शर्मा: डिजिटल और वित्तीय सशक्तिकरण से बदल रही हैं मुसाबनी की तस्वीर
मुनादी लाइव, पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के दूरस्थ इलाकों में अक्सर विकास की रफ्तार धीमी दिखती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हालात से लड़कर बदलाव की नई कहानी लिखते हैं। पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी ब्लॉक में ऐसी ही एक मिसाल हैं पापिया शर्मा, जो आज ग्रामीण महिलाओं के लिए उम्मीद और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुकी हैं।
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) में कम्युनिटी और डिजिटल एंकर के रूप में कार्यरत पापिया न केवल महिलाओं को बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं से जोड़ रही हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रही हैं।
संघर्ष से निकली सशक्त सोच
पापिया शर्मा की अपनी जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही है। एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में विवाह के बाद उन्होंने करीब से देखा कि आर्थिक निर्भरता किस तरह महिलाओं के सपनों को सीमित कर देती है। इन्हीं अनुभवों ने उनके भीतर यह सोच पैदा की कि वित्तीय स्वतंत्रता ही महिलाओं की असली ताकत है। यही सोच आगे चलकर उनके सामुदायिक कार्य का आधार बनी।
बैंक खाते से भरोसे तक का सफर
मुसाबनी जैसे दूरस्थ क्षेत्र में शुरुआती दौर में महिलाओं के लिए बैंकिंग सेवाओं से जुड़ना भी आसान नहीं था। कई महिलाओं के पास बैंक खाते तो थे, लेकिन उनका उपयोग नहीं होता था। कारण थे:
- धोखाधड़ी का डर
- सरकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव
- बैंकिंग प्रक्रियाओं की जटिलता
पापिया ने इस स्थिति को बदलने का बीड़ा उठाया। वे रोज़ महिलाओं से मिलतीं, उन्हें समझातीं और अपने अनुभव साझा कर भरोसा पैदा करतीं। धीरे-धीरे महिलाएं बैंकिंग सेवाओं की ओर आकर्षित होने लगीं।
डिजिटल की ओर बढ़ता कदम
गेट्स फाउंडेशन द्वारा समर्थित पहलों के प्रभाव से पापिया का काम और मजबूत हुआ। उनकी भूमिका अब सिर्फ एक गाइड की नहीं रही, बल्कि वे महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद सहयोगी बन गईं। आज स्थिति यह है कि:
- 150 से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से बैंकिंग सेवाओं का उपयोग कर रही हैं
- सैकड़ों महिलाएं नकद से डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ चुकी हैं
- यह बदलाव न केवल आर्थिक पारदर्शिता ला रहा है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दे रहा है।
आय के नए रास्ते: मशरूम से सोलर पंप तक
पापिया का काम केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं है। वे महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों से भी जोड़ रही हैं।
- वे महिलाओं की मदद करती हैं:
- ऋण आवेदन और दस्तावेज़ीकरण में
- छोटे व्यवसाय की योजना बनाने में
- सोलर पंप और मशरूम खेती जैसे नवाचार अपनाने में
उनके प्रयासों से करीब 500 महिलाएं मशरूम खेती से जुड़कर डिजिटल भुगतान अपना चुकी हैं, जिससे उनकी आय सुरक्षित और पारदर्शी बनी है।
“गाँव की गूगल” बनीं पापिया
स्थानीय स्तर पर पापिया शर्मा को अब “गाँव की गूगल” कहा जाता है। कारण साफ है—वे सरकारी योजनाओं, बाजार, ऋण और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी हर जानकारी का भरोसेमंद स्रोत बन चुकी हैं। महिलाएं अब किसी भी संदिग्ध कॉल या वित्तीय निर्णय से पहले पापिया से सलाह लेती हैं, जिससे धोखाधड़ी की घटनाओं में भी कमी आई है।
जोगेश्वनी की कहानी: बदलाव की असली तस्वीर
पापिया के काम का असर जोगेश्वनी जैसी महिलाओं की कहानियों में साफ दिखता है। जो महिला कभी आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही थी, आज वह:
- 200 गायों वाला डेयरी व्यवसाय चला रही है
- साथ में किराना स्टोर भी संचालित कर रही है
- और पूरा कारोबार डिजिटल लेनदेन के माध्यम से कर रही है यह सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के बदलाव का संकेत है।
‘डिजिटल नारी, सशक्त नारी’ का साकार रूप
पापिया शर्मा की यह यात्रा इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि जब महिलाओं को सही जानकारी, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल खुद को बल्कि पूरे समाज को बदल सकती हैं। “डिजिटल नारी, सशक्त नारी” की अवधारणा यहां सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुकी है।
मुसाबनी की पापिया शर्मा आज उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाना चाहती हैं। उनकी पहल यह साबित करती है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और निरंतर प्रयासों की जरूरत होती है।
झारखंड के दूरस्थ इलाके से निकली यह कहानी पूरे देश के लिए एक संदेश है—
जब महिलाएं डिजिटल और आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तभी समाज का वास्तविक विकास संभव होगा।








