राज्यसभा चुनाव से पहले झामुमो में अंजनी सोरेन के नाम की गूंज, कार्यकर्ताओं की मजबूत दावेदारी
Ranchi : झारखंड में इस साल होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिनमें से एक सीट झामुमो के संरक्षक और झारखंड आंदोलन के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से पहले ही खाली हो चुकी है, जबकि दूसरी सीट पर भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल इसी वर्ष समाप्त हो रहा है। ऐसे में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के भीतर अब संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इन्हीं चर्चाओं के बीच झामुमो के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता एक स्वर में यह मांग कर रहे हैं कि इस बार दिशोम गुरु की बेटी अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजा जाए।
‘सोरेन परिवार का संसद में प्रतिनिधित्व पार्टी के लिए सम्मान’
झामुमो के केंद्रीय नेताओं से लेकर जिला अध्यक्ष और जमीनी कार्यकर्ताओं तक का मानना है कि दशकों बाद यह पहली बार है जब सोरेन परिवार का कोई भी सदस्य संसद में मौजूद नहीं है। शिबू सोरेन के निधन के बाद यह खालीपन और अधिक महसूस किया जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब सोरेन परिवार का कोई सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में झारखंड का प्रतिनिधित्व करता है, तो यह केवल परिवार नहीं, बल्कि पूरे झामुमो आंदोलन के लिए सम्मान की बात होती है।
ओडिशा में संघर्ष, झामुमो की आवाज बनीं अंजनी सोरेन
अंजनी सोरेन दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की बेटी हैं। विवाह के बाद उन्होंने ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं से आदिवासी समाज की आवाज बुलंद की। झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए ओडिशा जैसे राज्य में संगठन खड़ा करना आसान नहीं था, लेकिन अंजनी सोरेन ने वहां पार्टी का झंडा मजबूती से उठाया।
झामुमो ने उन्हें 2019 और 2024 में ओडिशा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार बनाया। हालांकि जीत नहीं मिल पाई, लेकिन उन्हें उल्लेखनीय वोट मिले, जिसे पार्टी उनके राजनीतिक संघर्ष और स्वीकार्यता के रूप में देख रही है।
झामुमो नेताओं का खुला समर्थन
झामुमो के वरिष्ठ नेता पवन जेडिया ने कहा कि अंजनी सोरेन केवल गुरुजी की बेटी नहीं हैं, बल्कि संघर्ष और आंदोलन की पहचान हैं। अगर पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजती है, तो इससे न सिर्फ झामुमो कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आएगा, बल्कि ओडिशा में भी पार्टी संगठन को मजबूती मिलेगी।
वहीं, रांची जिला अध्यक्ष मुश्ताक आलम का कहना है कि जब से अंजनी सोरेन ने ओडिशा झामुमो की जिम्मेदारी संभाली है, तब से वहां संगठनात्मक मजबूती आई है। ऐसे में उन्हें राज्यसभा भेजना पूरी तरह उचित होगा।
फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथ में
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि यह सच है कि काफी समय से संसद में सोरेन परिवार का कोई प्रतिनिधि नहीं है। उन्होंने कहा कि अंजनी सोरेन में भी वही रक्त प्रवाहित होता है, जिसने झारखंड आंदोलन को दिशा दी। उन्होंने गुरुजी के संघर्ष को नजदीक से देखा है और पार्टी के लिए लगातार संघर्ष किया है।
हालांकि, मनोज पांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर अंतिम फैसला पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है।
चुनाव गणित झामुमो के पक्ष में
राज्यसभा चुनाव के लिहाज से झारखंड विधानसभा में सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक की स्थिति मजबूत है। 81 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और सीपीआई माले के 2 विधायक शामिल हैं। ऐसे में इंडिया ब्लॉक के पास राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने का पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
अब देखना यह होगा कि झामुमो नेतृत्व एक सीट कांग्रेस को देता है या दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारता है। लेकिन पार्टी के भीतर जिस तरह से अंजनी सोरेन के नाम को लेकर सहमति बनती दिख रही है, उसने राज्यसभा चुनाव की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।








