JSSC परीक्षा स्थगित, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों का हेमंत सरकार पर हमला

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रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा झारखंड तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा–2023 को अचानक स्थगित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस फैसले से न केवल लाखों अभ्यर्थियों में निराशा फैली है, बल्कि विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर हेमंत सोरेन सरकार को आड़े हाथों लिया है। राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है।

परीक्षा स्थगन का बड़ा झटका
JSSC की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह परीक्षा 9 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2025 के बीच आयोजित की जानी थी। आयोग ने इसे “अपरिहार्य तकनीकी कारणों” का हवाला देते हुए स्थगित करने की घोषणा की है। हालांकि अधिसूचना में नई तिथि की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

सबसे बड़ी बात यह रही कि परीक्षा स्थगन की घोषणा उस समय की गई जब हजारों अभ्यर्थी पहले ही अपने परीक्षा केंद्रों वाले जिलों में पहुंच चुके थे। कई परीक्षार्थी दूर-दराज से आए थे और होटलों व छात्रावासों में ठहरे हुए थे। अचानक आए इस फैसले से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी और मायूसी है।

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चंपाई सोरेन ने कहा — “युवाओं के साथ खिलवाड़”
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा,

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“कल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की झारखंड तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा शुरू होने वाली थी। सभी प्रतियोगी अपने परीक्षा केंद्रों में पहुंच चुके होंगे और अब अचानक परीक्षा स्थगित कर दी गई। यह युवाओं के सपनों, उनकी उम्मीदों एवं आकांक्षाओं के साथ खिलवाड़ है। अगर परीक्षा लेने में सक्षम नहीं हैं तो पहले सूचना क्यों नहीं दी गई? ऐसी नकारा एजेंसियों को बंद कर देना चाहिए।”

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बाबूलाल मरांडी ने बोला — “हेमंत सरकार कर रही विश्वासघात”
पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा,

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“हेमंत सोरेन जी ने युवाओं के साथ फिर वही किया, जो अब तक करते आए हैं — विश्वासघात! अचानक से तकनीकी खामियों का हवाला देकर परीक्षा रद्द कर दी गई। क्या हेमंत जी के दिल्ली में होने की वजह से तकनीकी सेटिंग ढंग से नहीं हो पाई या फिर कोई और समस्या थी? वजह चाहे जो हो, नुकसान युवाओं का ही हुआ है।”

मरांडी ने यह भी मांग की कि सरकार न केवल परीक्षा की नई तिथि शीघ्र घोषित करे बल्कि परीक्षा केंद्र तक आने-जाने में अभ्यर्थियों को हुए खर्च की भरपाई भी करे।

रघुवर दास का तीखा हमला — “निकम्मी सरकार को युवाओं का जवाब मिलेगा”
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हेमंत सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा,

“धिक्कार है इस सरकार पर! रात के अंधेरे में चोरी छिपे अचानक परीक्षा स्थगित कर एक बार फिर छात्रों के साथ धोखाधड़ी की गई। छात्रों की उम्र बढ़ती जा रही है और यह निकम्मी सरकार एक परीक्षा भी सही ढंग से नहीं ले पा रही है। झारखंड के युवा इस सरकार को सबक सिखाएंगे।”

युवाओं में बढ़ा आक्रोश, फूट पड़ा गुस्सा
राज्य के विभिन्न जिलों से आए कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वे महीनों से इस परीक्षा की तैयारी में जुटे थे। कई लोग निजी संस्थानों में पढ़ाई कर रहे थे और अपनी जेब से यात्रा व ठहरने का खर्च उठा कर परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। ऐसे में अंतिम समय पर परीक्षा स्थगित करना न केवल आर्थिक बोझ है बल्कि मानसिक रूप से भी बड़ा झटका है।

रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे शहरों में छात्रों ने परीक्षा स्थगित होने पर नाराजगी जताई और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।

JSSC ने दी सफाई, जल्द घोषित होगी नई तिथि
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि “परीक्षा को अपरिहार्य तकनीकी कारणों से स्थगित किया गया है। नई तिथियों की घोषणा जल्द की जाएगी।” हालांकि आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर तकनीकी कारण क्या थे, जिससे इस तरह अंतिम क्षण में निर्णय लेना पड़ा।

राजनीतिक रंग लेता मुद्दा
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में सियासत को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे युवाओं के साथ धोखाधड़ी बताते हुए हेमंत सरकार पर हमलावर है, जबकि सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए ही स्थगन का निर्णय लिया गया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनावी साल में इस तरह की घटनाएं युवाओं में सरकार के खिलाफ माहौल बना सकती हैं।

JSSC परीक्षा स्थगन ने न केवल हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी पर पानी फेर दिया है, बल्कि इसे लेकर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। विपक्ष के हमलों और छात्रों के आक्रोश के बीच अब राज्य सरकार और आयोग के सामने परीक्षा को पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की चुनौती और बढ़ गई है।

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