ईरान संकट में पलामू के तीन छात्र फंसे, हुसैनाबाद में निकला कैंडल मार्च
कुम में दीनी तालीम ले रहे छात्रों की सुरक्षित वापसी की मांग, परिजनों में बढ़ी चिंता
रांची: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने झारखंड के पलामू जिले तक चिंता की लहर फैला दी है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव और संयुक्त राज्य अमेरिका की सक्रियता के बीच पलामू के हुसैनाबाद नगर क्षेत्र के तीन छात्र ईरान में फंसे हुए हैं। इस खबर के बाद उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
कुम में पढ़ाई कर रहे हैं छात्र
जानकारी के अनुसार, हुसैनाबाद के सैयद टोली मोहल्ला निवासी सैयद जिशान हुसैन, सैयद सलमान हुसैन और जिशान हुसैन उच्च धार्मिक शिक्षा के लिए ईरान गए हुए थे। वे ईरान के कुम शहर में रहकर दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं।
हालिया घटनाक्रम के बाद वहां की स्थिति असामान्य बताई जा रही है। परिजन लगातार संपर्क में बने हुए हैं, लेकिन बढ़ते तनाव के कारण उनकी चिंता कम नहीं हो रही। परिवारों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि बच्चों को सुरक्षित भारत लाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं।
हुसैनाबाद में कैंडल मार्च
इधर, पलामू के हुसैनाबाद शहर में रविवार रात मुस्लिम समाज के लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर चिंता और विरोध दर्ज कराया। यह मार्च सदर इमामबाड़ा से शुरू होकर मुख्य बाजार, गांधी चौक, आंबेडकर चौक होते हुए जेपी चौक तक पहुंचा, जहां एक सभा आयोजित की गई।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने क्षेत्रीय हालात पर चिंता व्यक्त की और शांति की अपील की। वक्ताओं ने मौजूदा संघर्ष को लेकर अपने विचार रखे और ईरान के समर्थन में नारे लगाए।
‘ईरान की जीत’ का भरोसा
सभा में वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ईरान का मनोबल कमजोर नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उस पर हमला अनुचित है। साथ ही फिलिस्तीन मुद्दे पर भी आवाज बुलंद की गई।
कैंडल मार्च में मौलाना सैयद अली सजीर, मौलाना सैयद मुसबी रजा, सैयद तक्की हुसैन, इकबाल हुसैन, शेर अली, फिरोज हुसैन, सब्बीर अहमद, आरजू खान और सैफ हुसैन समेत कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। हैदरनगर और झरगाढ़ा क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
सुरक्षित वापसी की दुआ
वर्तमान हालात ने जहां विदेश में पढ़ रहे छात्रों के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं स्थानीय स्तर पर भी लोग शांति और सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, ताकि फंसे छात्रों को जल्द सुरक्षित घर लाया जा सके।








