रांची नगर निगम वार्ड आरक्षण पर विवाद, ST से ज्यादा OBC सीटों पर सवाल
Ranchi: नगर निकाय चुनाव को लेकर रांची नगर निगम क्षेत्र में वार्डों के आरक्षण पर अब सियासी घमासान शुरू हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई वार्डवार आरक्षण सूची पर संवैधानिक नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि 53 वार्डों वाले रांची नगर निगम क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (ST) की तुलना में पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अधिक सीटें आरक्षित कर दी गई हैं, जबकि OBC के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान है।
पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने उठाए गंभीर सवाल
रांची नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने जिला प्रशासन द्वारा जारी आरक्षण सूची पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से वार्डों का आरक्षण तय किया गया है, उससे यह प्रतीत होता है कि पूरी प्रक्रिया किसी खास वर्ग या व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
उन्होंने कहा,
“वार्ड नंबर 5 से 13 तक लगभग लगातार आरक्षित होना संदेह पैदा करता है। यह किस जनगणना के आधार पर तय किया गया है, जिला प्रशासन को यह सार्वजनिक करना चाहिए।”
संजीव विजयवर्गीय ने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य में ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत है, तो फिर रांची नगर निगम में ST से अधिक OBC वार्ड कैसे आरक्षित कर दिए गए।
झामुमो ने आरक्षण सूची को बताया सही
वहीं सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने वार्डों के आरक्षण को पूरी तरह संवैधानिक और उचित बताया है। पार्टी प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि नगर निकाय चुनाव को लेकर सरकार और प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव दलगत आधार पर होते हैं तो पार्टी आगे रणनीति तय करेगी, और यदि गैर-दलीय आधार पर चुनाव होते हैं तो झामुमो के कार्यकर्ता मैदान में उतरेंगे और पार्टी उनका समर्थन करेगी।
53 वार्डों में आरक्षण का गणित
जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार—
- कुल वार्ड: 53
- अनारक्षित: 27
- अनुसूचित जाति (SC): 2
- अनुसूचित जनजाति (ST): 11
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 13
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1: 9
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग-2: 4
वार्ड संख्या 53 को अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
चुनाव से पहले आरक्षण बना बड़ा मुद्दा
नगर निकाय चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है। विपक्ष जहां इसे संवैधानिक असंतुलन बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे नियमों के अनुरूप बता रहा है।








