रांची रेल मंडल में ड्रग तस्करी पर वार, 11.5 लाख का गांजा पकड़ाया

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रांची : रांची रेल मंडल में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी अभियान के तहत हटिया रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ हटिया पोस्ट और फ्लाइंग टीम रांची ने संयुक्त अभियान चलाते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। कार्रवाई के दौरान आरपीएफ ने लगभग 11.5 लाख रुपये मूल्य का गांजा जब्त किया है और इसके साथ दो तस्करों को रंगे हाथों दबोच लिया है।

यह कार्रवाई आरपीएफ रांची के कमांडेंट पवन कुमार के निर्देश पर की गई। मंगलवार को हटिया रेलवे स्टेशन परिसर में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह और फ्लाइंग टीम के जवानों की नजर दो ऐसे व्यक्तियों पर पड़ी, जो संदिग्ध अवस्था में बैठे हुए थे। दोनों की गतिविधियां सामान्य यात्रियों से अलग प्रतीत हो रही थीं, जिससे आरपीएफ टीम को शक हुआ।

सुरक्षा नियमों के तहत टीम ने दोनों व्यक्तियों से पूछताछ की और उनके सामान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान दोनों के बैगों से चार अलग-अलग पैकेटों में बंद कुल 23 किलो गांजा बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि यह मादक पदार्थ तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। बरामद गांजा की अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप नहीं, बल्कि स्थानीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 11 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है।

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बरामदगी के बाद आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त अशोक कुमार सिंह की मौजूदगी में जब्त मादक पदार्थ की जांच की गई। जांच के लिए विशेष डीडी किट का प्रयोग किया गया, जिसमें बरामद पदार्थ गांजा (मैरिजुआना) के रूप में पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए गांजा और दोनों आरोपियों को आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी हटिया के हवाले कर दिया गया।

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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद फिरोज और राम बिलास चौधरी के रूप में हुई है। मोहम्मद फिरोज की उम्र लगभग 32 वर्ष है और वह पश्चिम चंपारण जिले के पथखौली थाना क्षेत्र अंतर्गत नरवल, नरईपुर का निवासी है। वहीं, दूसरे आरोपी राम बिलास चौधरी की उम्र करीब 27 वर्ष है और वह पश्चिम चंपारण जिले के भीताहा थाना क्षेत्र के रुपहीटांड़ गांव का रहने वाला बताया गया है। दोनों ही आरोपी बिहार के सीमावर्ती इलाके के निवासी हैं, जिससे यह संदेह गहराता है कि गांजा तस्करी का यह नेटवर्क अंतर-राज्यीय स्तर पर संचालित हो रहा है।

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आरपीएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मोहम्मद फिरोज के पास से एक नीले रंग का पिट्ठू बैग और एक भूरे रंग का ट्रॉली बैग बरामद किया गया, जिसमें गांजा छिपाकर ले जाया जा रहा था। वहीं, राम बिलास चौधरी के पास से एक हरे रंग का पिट्ठू बैग और एक ग्रे रंग का हैंड बैग मिला, जिसमें भी गांजा के पैकेट रखे हुए थे। कुल मिलाकर चार पैकेट गांजा बरामद हुआ, जिसका वजन 23 किलो पाया गया।

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पूछताछ के दौरान जब दोनों से मादक पदार्थ के संबंध में वैध दस्तावेज या परमिट मांगा गया, तो वे कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। गहन पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने उक्त गांजा ओडिशा के राउरकेला क्षेत्र से एक अज्ञात व्यक्ति से खरीदा था। दोनों इसे धनबाद ले जाकर वहां किसी अज्ञात व्यक्ति को सप्लाई करने की योजना में थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि रेलवे मार्ग का इस्तेमाल गांजा तस्करी के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि रांची रेल मंडल ड्रग तस्करी के लिए एक संवेदनशील रूट बनता जा रहा है, जिसे देखते हुए जांच और निगरानी को और अधिक सख्त किया गया है। स्टेशन, ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर लगातार औचक जांच अभियान जारी रहेगा, ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

इस कार्रवाई को रांची रेल मंडल में ड्रग तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मान रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से न सिर्फ दो तस्कर गिरफ्तार हुए हैं, बल्कि तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की परतें भी खुल सकती हैं। आने वाले दिनों में जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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