शिल्पी नेहा तिर्की बनीं ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस की बिहार चुनाव पर्यवेक्षक
कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर शुरू की संगठनात्मक तैयारियां, आदिवासी वोट बैंक पर फोकस
रांची: कांग्रेस पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अपनी संगठनात्मक तैयारियों में तेजी लाते हुए झारखंड की युवा नेत्री शिल्पी नेहा तिर्की को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस (AICC) की ओर से बिहार विधानसभा चुनाव का ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) नियुक्त किया गया है।
इस संबंध में ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश के विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर उनकी नियुक्ति की घोषणा की। पत्र के मुताबिक, शिल्पी नेहा तिर्की को बिहार में आदिवासी समुदायों के बीच कांग्रेस का संदेश पहुँचाने, संगठन को मजबूत करने और चुनावी अभियान के ग्रासरूट समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आदिवासी वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर
ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस ने बिहार में इस बार विशेष रणनीति तैयार की है। पार्टी का उद्देश्य राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में संगठन को सक्रिय कर पार्टी के जनाधार को सशक्त करना है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि बिहार के सीमावर्ती और पर्वतीय इलाकों में आदिवासी समुदायों की मजबूत उपस्थिति है, जो आने वाले विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. विक्रांत भूरियाने अपने पत्र में लिखा है कि –
“पार्टी का लक्ष्य है कि हर आदिवासी परिवार और समूह तक कांग्रेस का संदेश पहुँचे। संगठनात्मक रूप से मजबूत जमीनी नेटवर्क ही 2025 के चुनाव में जीत की कुंजी बनेगा।”
उन्होंने शिल्पी नेहा तिर्की को यह भी निर्देश दिया है कि वे बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष से मिलकर आगे की रणनीति तय करें और समय-समय पर चुनावी रिपोर्ट सौंपें।
बिहार वार रूम के साथ होगा समन्वय
पार्टी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, शिल्पी नेहा तिर्की बिहार वार रूम और प्रदेश कांग्रेस संगठन के साथ समन्वय स्थापित कर जमीनी स्तर पर प्रचार अभियान को गति देने की दिशा में काम करेंगी। वे आदिवासी समुदायों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए कांग्रेस के घोषणापत्र और वादों को समाज तक पहुँचाने का काम भी करेंगी। सूत्रों के अनुसार, बिहार में कांग्रेस पार्टी ने आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों के बीच अलग-अलग “जन संवाद अभियान” चलाने का निर्णय लिया है। शिल्पी नेहा तिर्की की सक्रियता और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस संगठन में बढ़ा झारखंड का प्रभाव
गौरतलब है कि झारखंड से आने वाली शिल्पी नेहा तिर्की लगातार राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के आदिवासी मोर्चे की सक्रिय सदस्य रही हैं। उनकी नियुक्ति को झारखंड कांग्रेस संगठन के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि झारखंड से आदिवासी नेतृत्व को राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस लगातार कदम उठा रही है। इससे न केवल पार्टी का आदिवासी जनाधार सुदृढ़ होगा, बल्कि झारखंड और बिहार के बीच राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होगा।
कांग्रेस नेतृत्व का भरोसा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि शिल्पी नेहा तिर्की की सक्रिय भूमिका से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को नए सिरे से उम्मीद जगी है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, उनका मानना है कि उनकी नियुक्ति से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस ने भी इस निर्णय को बिहार के चुनावी समीकरण में “रणनीतिक कदम” बताया है।
शिल्पी नेहा तिर्की की प्रतिक्रिया
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा —
“कांग्रेस पार्टी ने जो भरोसा जताया है, उसके लिए मैं आभारी हूँ। बिहार के आदिवासी समाज को सशक्त बनाना, उन्हें राजनीतिक रूप से संगठित करना और कांग्रेस के संदेश को हर गांव तक पहुँचाना मेरा लक्ष्य होगा।”
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय कांग्रेस पार्टी की रीढ़ हैं और उनका सम्मान, अधिकार और पहचान कांग्रेस की प्राथमिकता में है।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस द्वारा आदिवासी नेतृत्व को चुनावी जिम्मेदारी देना बिहार में एक नए समीकरण की ओर इशारा करता है। 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन के लिए आदिवासी वोटों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में, झारखंड की जमीनी पहचान और राजनीतिक समझ रखने वाली शिल्पी नेहा तिर्की को पर्यवेक्षक बनाना कांग्रेस की रणनीतिक चाल मानी जा रही है।








