विनय चौबे से जुड़े वन भूमि घोटाले में विनय सिंह की मुश्किलें बढ़ीं
ACB ने केस 20/2025 में किया रिमांड पर गिरफ्तार
Ranchi: झारखंड के बहुचर्चित वन भूमि घोटाले और आय से अधिक संपत्ति मामले में एक बार फिर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त रहे IAS विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान हुए कथित वन भूमि घोटाले से जुड़े आरोपी विनय सिंह को ACB ने कांड संख्या 20/2025 में औपचारिक रूप से रिमांड पर गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद विनय सिंह की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
चार मामलों में फंसे विनय सिंह, जेल से बाहर निकलना आसान नहीं
ACB सूत्रों के अनुसार, विनय सिंह फिलहाल कुल चार मामलों में आरोपी हैं। इनमें से केवल शराब घोटाले से जुड़े एक मामले में उन्हें राहत मिली है, जबकि शेष तीन मामलों में अब भी उन्हें जमानत नहीं मिली है। ऐसे में जब तक सभी मामलों में जमानत नहीं मिलती, तब तक विनय सिंह का जेल से बाहर आना संभव नहीं है।
रिमांड पर गिरफ्तारी के बाद अब एसीबी उनसे वन भूमि घोटाले और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में गहन पूछताछ करेगी।
ACB में दर्ज तीन केस, एक मामला जगन्नाथपुर थाना में
जानकारी के मुताबिक, विनय सिंह के खिलाफ ACB में तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इसके अलावा रांची के जगन्नाथपुर थाना में भी उनके विरुद्ध एक आपराधिक मामला दर्ज है। जिस केस में उन्हें अब रिमांड पर लिया गया है, वह आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से जुड़ा मामला है, जिसे एसीबी ने पिछले महीने दर्ज किया था।
आय से अधिक संपत्ति केस में कई बड़े नाम शामिल
आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में एसीबी ने कई प्रभावशाली नामों को अभियुक्त बनाया है। इस केस में निलंबित IAS विनय चौबे, उनकी पत्नी स्वप्ना संचिता, विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, विनय चौबे के साले शिपीज त्रिवेदी, उनकी पत्नी प्रियंका त्रिवेदी और विनय चौबे के ससुर सत्येंद्र नाथ त्रिवेदी को नामजद आरोपी बनाया गया है।
एसीबी का आरोप है कि हजारीबाग में DC रहते हुए विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान वन भूमि से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और इसी के जरिए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई।
ACB की जांच तेज, आगे और खुलासों की संभावना
ACB अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से इस पूरे नेटवर्क की कई और परतें खुल सकती हैं। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को किन-किन माध्यमों से निवेश किया गया और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
झारखंड में यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े प्रशासनिक और आर्थिक घोटाले की शक्ल लेता जा रहा है।








