आजादी के 79 वर्ष बाद भी सड़क सुविधा से वंचित मारगो पहाड़ गांव
पगडंडी पर निर्भर ग्रामीणों की जिंदगी
सुमित भगत लिट्टीपाड़ा (पाकुड़): झारखंड गठन से लेकर आजादी के 79 वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन बाड़ू पंचायत का मारगो पहाड़ गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। सरकार की योजनाओं, नीतियों और दावों के बावजूद यह गांव आज भी पगडंडी और पत्थरीले रास्तों पर निर्भर है। विडंबना यह है कि यह गांव प्रखंड मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर स्थित है, फिर भी विकास की रोशनी यहां तक नहीं पहुंच सकी।
गांव तक जाने वाला रास्ता धनी मारगो से अचानक खत्म हो जाता है और आगे सिर्फ संकरे, ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे प्राकृतिक रास्ते ही ग्रामीणों का सहारा बनते हैं। बरसात के दिनों में यह दुश्वारी और गहरी हो जाती है, क्योंकि रास्ते पर छोटी-छोटी नालियां बहने लगती हैं और कई स्थानों पर पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं होने से जीवन एक संघर्ष बन गया है।
बीमारों को अभी भी खटिया पर लादकर ले जाना पड़ता है अस्पताल
गांव के प्रधान मांगू पहाड़िया, कमला पहाड़िया, बामडा पहाड़िया और चांदू पहाड़िया बताते हैं कि सड़क नहीं होने का सबसे बड़ा असर आपातकालीन स्थितियों में देखने को मिलता है। किसी ग्रामीण की तबीयत खराब हो जाए तो एंबुलेंस के पहुंचने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मजबूरी में लोगों को मरीज को खटिया पर लादकर कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ता है, तब कहीं जाकर सड़क मिलती है और फिर वाहन द्वारा अस्पताल ले जाया जाता है।
कई मामलों में देरी होने से बीमार की हालत और बिगड़ जाती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह रास्ता किसी परीक्षा से कम नहीं है।


जन मन आवास योजना अटकी, निर्माण सामग्री गांव तक नहीं ले जा सकते
गांव के लोग बताते हैं कि जन मन आवास योजना के तहत कुछ घरों की स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण निर्माण सामग्री गांव तक पहुंचा पाना असंभव है। बड़े वाहन छोड़िए, छोटे वाहन भी गांव तक नहीं जा सकते। ग्रामीण सिर पर ईंट, सीमेंट और रेत ढोकर ले जाने को मजबूर हैं, लेकिन पहाड़ी इलाका होने के कारण यह भी आसान नहीं है।
इस वजह से आवास योजना की अधिकांश स्वीकृतियां कागजों पर ही अटकी रह गई हैं और लोग वर्षों से अपने घर के इंतजार में हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर भारी असर, 4–5 किलोमीटर पैदल चलना मजबूरी
शिक्षा के क्षेत्र में भी सड़क की कमी गहरा असर डाल रही है। बेहतर शिक्षा के लिए गांव के बच्चों को 4–5 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है, जहां से आगे की यात्रा शुरू होती है। बरसात या गर्मी में यह यात्रा बहुत कठिन हो जाती है, जिसके कारण बच्चों की नियमितता प्रभावित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं रहने से गांव का भविष्य अंधेरे में छिप रहा है, और बच्चों की शिक्षा को सबसे बड़ा नुकसान हो रहा है।
चुनाव के समय नेता आते हैं, वादे करते हैं—फिर कोई नहीं लौटता
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव आते ही कई नेता गांव पहुंचकर मीठे वादे करते हैं—सड़क, बिजली, पानी और आवास देने का आश्वासन भी देते हैं, पर चुनाव के बाद कोई मुड़कर नहीं देखता। नेता केवल वादे करते हैं, लेकिन जमीनी विकास के नाम पर कुछ नहीं होता। ग्रामीणों ने कहा कि हम हर बार नेताओं पर विश्वास करते हैं, लेकिन हर बार धोखा ही मिलता है।
प्रशासन का जवाब—सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) संजय कुमार ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए डीएमएफटी (District Mineral Foundation Trust) और आदि कर्मयोगी योजना के तहत प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की जा रही है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे प्रस्ताव पहले भी कई बार भेजे गए, लेकिन न तो मंजूरी मिली और न ही सड़क बनी।
बदलाव की उम्मीद में जी रहा है मारगो पहाड़ गांव
मारगो पहाड़ गांव के लोग अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार, प्रशासन और प्रतिनिधि उनकी दशकों पुरानी पीड़ा को समझेंगे और सड़क निर्माण का काम जल्द शुरू होगा। सड़क सुविधा गांव के विकास की पहली सीढ़ी है और जब तक यह नहीं बनेगी, गांव का हर क्षेत्र—स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और जीवन—कठिनाइयों से घिरा रहेगा।








