दुमका से हेमंत सोरेन की हुंकार: “झारखंड के हक के लिए कोर्ट तक जाएंगे

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Dumka: दुमका के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित झारखंड दिवस समारोह इस बार राजनीतिक रूप से बेहद तीखा और संदेशों से भरा रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंच से केंद्र सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि झारखंड के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो राज्य अपने अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगा।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। समारोह में बड़ी संख्या में जुटी भीड़ के सामने सोरेन ने अपनी बात बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में रखी।

“संवैधानिक संस्थाओं का हो रहा दुरुपयोग”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर राज्यों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

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उन्होंने कहा, “संवैधानिक शक्तियों को जेब में रखकर प्रजातंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वोट की ताकत को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। हम भले संसाधनों में कमजोर हों, लेकिन समझ में कमजोर नहीं हैं।”

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सोरेन ने यह भी संकेत दिया कि झारखंड सरकार इन मुद्दों पर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। उनके इस बयान को केंद्र–राज्य टकराव के संदर्भ में एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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जनता से एकजुट रहने की अपील
मुख्यमंत्री ने सभा में मौजूद लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि झारखंड की ताकत उसकी जनता है और जनता के समर्थन से ही सरकार राज्य के अधिकारों की लड़ाई लड़ सकती है।

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उन्होंने कहा, “आप सबकी बदौलत ही हम यहां हैं। अगर आप अपना हक चाहते हैं तो अपने बच्चों को पढ़ाइए, उन्हें मजबूत बनाइए। जब समाज शिक्षित और जागरूक होगा तभी झारखंड आगे बढ़ेगा।”

संथाली में भाषण, शिबू सोरेन को किया याद
कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा संथाली भाषा में दिया। इससे आदिवासी समुदाय के बीच खासा उत्साह देखने को मिला।

उन्होंने झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

सोरेन ने कहा, “दिशोम गुरु आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष, उनका सपना और उनका मार्गदर्शन हमेशा हमारे साथ है। हम उसी रास्ते पर चलकर झारखंड को आगे बढ़ाएंगे।”

SIR को लेकर भी चेतावनी
कार्यक्रम में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन अंसारी और राजमहल सांसद विजय हांसदा ने भी लोगों को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने लोगों से मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सतर्क रहने की अपील की।

उन्होंने आशंका जताई कि कुछ लोग तकनीकी बहानों से मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश कर सकते हैं। नेताओं ने जनता से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

राजनीतिक संदेश साफ
दुमका की इस सभा से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य के बीच टकराव का राजनीतिक स्वर और तेज हो सकता है। झारखंड दिवस के मंच से दिया गया यह भाषण सिर्फ श्रद्धांजलि या उत्सव का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी था — कि झारखंड अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार है।

सभा के बाद भी गांधी मैदान के आसपास राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी रहा, जिससे साफ है कि इस भाषण का असर आने वाले दिनों की राजनीति में जरूर देखने को मिलेगा।

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