हिरणपुर को नगर पंचायत बनाने की मांग तेज, झारखंड आंदोलनकारी दिगम्बर साहा ने सरकार से की ठोस कार्रवाई की अपील
पाकुड़: हिरणपुर प्रखंड को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। मान्यता प्राप्त झारखंड आंदोलनकारी नेता दिगम्बर साहा ने कहा कि हिरणपुर क्षेत्र की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और व्यापारिक गतिविधियां नगर पंचायत के सभी मानकों पर खरी उतरती हैं, फिर भी इसे अब तक नगर पंचायत घोषित नहीं किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
वर्षों से जारी है मांग
दिगम्बर साहा ने बताया कि वह लंबे समय से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव तथा पाकुड़ जिला उपायुक्त को कई बार लिखित आवेदन भी प्रेषित किया है। उनका कहना है कि हिरणपुर प्रखंड के दो पंचायतों और लिट्टीपाड़ा प्रखंड के दो पंचायत — सुंदरपुर, हाथकाठी, जबरदाह और कामलघाटी — को मिलाकर नगर पंचायत का गठन किया जा सकता है, जिससे इलाके का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।
व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरा है हिरणपुर
दिगम्बर साहा ने कहा कि हिरणपुर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है, जहाँ प्रतिदिन हजारों ग्रामीण अपनी आवश्यक वस्तुओं की खरीद-बिक्री के लिए आते हैं। क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, परिवहन और प्रशासनिक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। अगर इसे नगर पंचायत का दर्जा दिया जाता है, तो सरकार को कर राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ आम जनता को शहरी सुविधाएं मिल सकेंगी। इसमें सड़क, जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
पिछड़े क्षेत्र में विकास की संभावनाएं
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन का मुख्य उद्देश्य ही पिछड़े क्षेत्रों का विकास था, ताकि स्थानीय लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। हिरणपुर जैसे संभावनाओं से भरे क्षेत्र को अब भी नगर पंचायत की श्रेणी में न रखना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द इस क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा प्रदान करे।
जन आंदोलन की चेतावनी
दिगम्बर साहा ने कहा कि अगर राज्य सरकार ने इस दिशा में जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे स्थानीय जनता के साथ मिलकर जन आंदोलन की राह अपनाएंगे। उन्होंने कहा, “हिरणपुर को उसका हक मिलना ही चाहिए। यह सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि विकास की अनिवार्यता है।”






