ईरान ने अमेरिकी THAAD सिस्टम को बनाया निशाना, जॉर्डन का रक्षा तंत्र तबाह; पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात
मुनादी लाइव: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब और गंभीर होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली THAAD को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है। रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और जॉर्डन में तैनात अमेरिकी रक्षा तंत्र को लक्ष्य बनाया गया, जिसमें जॉर्डन में मौजूद एक THAAD सिस्टम गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।
जानकारी के मुताबिक इस रक्षा प्रणाली की कीमत करीब 22 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के पास दुनिया भर में इस प्रकार के केवल सात THAAD सिस्टम ही मौजूद हैं, इसलिए इस हमले को अमेरिका की रणनीतिक सुरक्षा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अमेरिका की कड़ी चेतावनी
इस घटना के बाद अमेरिका ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रहती है तो ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है।
अमेरिका ने संकेत दिया है कि संभावित हमलों में ईरान के मिसाइल लॉन्चर, हथियार निर्माण इकाइयों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा। इस बीच इजरायल ने भी तेहरान स्थित मेहराबाद हवाई अड्डे के आसपास कुछ सैन्य ठिकानों पर हमला किए जाने की खबर सामने आई है।

ईरान का कड़ा जवाब
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिका की उस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा गया था।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उनका कहना था कि यह उम्मीद करना कि ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण कर देगा, केवल एक कल्पना है जो कभी पूरी नहीं होगी।
पड़ोसी देशों को लेकर सफाई
ईरान ने यह भी कहा कि उसका पड़ोसी देशों को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं है। ईरानी सरकार ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी देश की जमीन से उसके खिलाफ हमला नहीं होता, तब तक वह उन देशों को लक्ष्य नहीं बनाएगा।
साथ ही सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में हुए हमलों को लेकर ईरान की ओर से खेद भी व्यक्त किया गया है। ईरान का कहना है कि इन घटनाओं का उद्देश्य उन देशों को निशाना बनाना नहीं था।
बढ़ता जा रहा क्षेत्रीय संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग और ऊर्जा बाजार पर इसका असर पड़ने की आशंका पहले से ही जताई जा रही है।
फिलहाल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है और दुनिया भर की निगाहें अब इस संकट पर टिकी हुई हैं।








