बीकानेर के भागीरथ सिंह ने रचा इतिहास: RBSE 12वीं साइंस में 500 में 500 अंक, दिव्यांग छात्रों के लिए बने मिसाल

RBSE 12th Topper

अजमेर/बीकानेर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर द्वारा शनिवार को घोषित दिव्यांग विद्यार्थियों के परिणाम में बीकानेर के छात्र भागीरथ सिंह ने अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल कर इतिहास रच दिया है। सीनियर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) साइंस (मैथ्स) स्ट्रीम में भागीरथ सिंह ने 500 में से पूरे 500 अंक प्राप्त कर न केवल प्रदेश में टॉप किया, बल्कि एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो आने वाले वर्षों तक याद रखी जाएगी।

पांचों विषयों में शत-प्रतिशत अंक
भागीरथ सिंह ने अपने सभी पांचों विषयों में 100-100 अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। बोर्ड परीक्षाओं में पूर्ण अंक प्राप्त करना बेहद दुर्लभ माना जाता है, खासकर साइंस (मैथ्स) जैसे कठिन स्ट्रीम में, लेकिन भागीरथ ने इसे संभव कर दिखाया।

ccl.psd
Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school

दिव्यांगता को नहीं बनने दिया बाधा
भागीरथ सिंह की यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है, क्योंकि वे दिव्यांग हैं। जहां सामान्य परिस्थितियों में भी बोर्ड परीक्षा चुनौतीपूर्ण होती है, वहीं शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और निरंतर प्रयास करते हुए यह मुकाम हासिल किया। उनकी ये सफलता यह संदेश है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

Vedanta iron steel
dipika pandey sing
15 Aug 2026 poat Ads Ramgarh
रमेश सिंह
Dulari Son

अनुशासन और निरंतर अभ्यास बना सफलता की कुंजी
सूत्रों के अनुसार, भागीरथ सिंह ने अपनी पढ़ाई में नियमितता और अनुशासन बनाए रखा। उन्होंने हर विषय की गहराई से तैयारी की, कॉन्सेप्ट क्लियर रखने पर जोर दिया और समय प्रबंधन को प्राथमिकता दी, इन्हीं आदतों ने उन्हें यह ऐतिहासिक सफलता दिलाई।

munadi live whattsapp banne.jpg

पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा
भागीरथ सिंह की यह उपलब्धि न केवल बीकानेर, बल्कि पूरे राजस्थान और देश के लिए प्रेरणादायक है। खासकर दिव्यांग छात्रों के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि सीमाएं केवल शारीरिक नहीं होतीं, बल्कि मानसिक होती हैं — और यदि संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

resizone elanza

Telegram channel

परिवार और शिक्षकों का योगदान
इस सफलता के पीछे भागीरथ के परिवार और शिक्षकों की अहम भूमिका रही है। परिवार ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया, जबकि शिक्षकों ने उन्हें सही दिशा और मार्गदर्शन दिया, जिससे वे अपनी क्षमता का पूरा उपयोग कर सके।

शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि यदि शिक्षा प्रणाली में सही समर्थन और अवसर दिए जाएं, तो हर छात्र अपनी क्षमता का सर्वोत्तम प्रदर्शन कर सकता है। यह परिणाम समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

बीकानेर के भागीरथ सिंह ने अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो हार नहीं मानते। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह संदेश देती रहेगी कि “सीमाएं नहीं, संकल्प मायने रखता है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *