ईरान के सस्ते लेकिन घातक ड्रोन से परेशान अमेरिका-इजरायल, बचाव के लिए यूक्रेन से मांगी मदद
मुनादी लाइव : मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान के ड्रोन हमलों ने अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों की सुरक्षा व्यवस्था को नई चुनौती दे दी है। अपेक्षाकृत सस्ते लेकिन अत्यंत घातक इन ड्रोन ने पूरे क्षेत्र में खतरे की नई स्थिति पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों से लैस होने के बावजूद अमेरिका और इजरायल को इन छोटे और तेज ड्रोन से निपटने में कठिनाई हो रही है। यही कारण है कि अब अमेरिका ने इस खतरे से निपटने के लिए यूक्रेन से सहयोग मांगा है।
यूक्रेन से मांगी मदद
यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका ने ईरानी ड्रोन से बचाव के उपायों पर यूक्रेन से तकनीकी अनुभव साझा करने का अनुरोध किया है।
दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस ने ईरान के इसी प्रकार के ड्रोन का व्यापक उपयोग किया है। रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे इस ड्रोन के संस्करण को जेरान-2 नाम से जाना जाता है। यूक्रेन ने पिछले कुछ वर्षों में इन ड्रोन से बचाव और उन्हें मार गिराने की तकनीक विकसित कर ली है।
युद्ध के दौरान यूक्रेन ने इन ड्रोन के खिलाफ कई नई रणनीतियां विकसित कीं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान, वायु रक्षा प्रणाली और विशेष निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है। अब वही अनुभव अमेरिका के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
क्या खास है इन ड्रोन में ?
ईरान के बनाए ये ड्रोन आकार में अपेक्षाकृत छोटे होते हैं, लेकिन उनकी मारक क्षमता काफी अधिक होती है। इनकी लंबाई लगभग 11 फीट के आसपास होती है और इनमें शक्तिशाली विस्फोटक वारहेड लगाया जाता है।
इन ड्रोन की एक बड़ी खासियत यह है कि ये अक्सर रात के समय उड़ान भरते हैं और कम ऊंचाई पर लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। इनके इंजन की आवाज मोटरसाइकिल जैसी होती है, जिसके कारण इन्हें कभी-कभी “मोटरसाइकिल ड्रोन” भी कहा जाता है।
इनमें विस्फोटक सामग्री के साथ टंगस्टन के छोटे गोले और ज्वलनशील धातुएं जैसे टाइटेनियम और जिरकोनियम भरे होते हैं। विस्फोट के समय ये धातुएं आग फैलाने और अधिक नुकसान पहुंचाने में मदद करती हैं।
क्यों बन गए बड़ी चुनौती ?
इन ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत उनकी कम लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक ड्रोन की लागत पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बहुत कम होती है, लेकिन नुकसान काफी बड़ा हो सकता है।
इसी कारण युद्ध के मैदान में इन्हें बड़ी संख्या में एक साथ भेजा जाता है। कई बार दर्जनों ड्रोन एक साथ लक्ष्य की ओर भेजे जाते हैं, जिससे रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ जाता है।
वैश्विक सुरक्षा पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इन ड्रोन का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन तकनीक की भूमिका और बढ़ने वाली है। ऐसे में इनसे निपटने के लिए नई तकनीक और रणनीति विकसित करना दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियों के लिए जरूरी होता जा रहा है।
फिलहाल अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देश इस चुनौती से निपटने के लिए नए उपाय तलाश रहे हैं, जबकि ईरान इन ड्रोन को अपनी रणनीतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।








