मिडिल ईस्ट तनाव चरम पर: ईरान का ऐलान—“आखिरी गोली तक लड़ेंगे”, हमले और पलायन से हालात गंभीर
मुनादी लाइव: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह “आखिरी गोली तक लड़ने” के लिए तैयार है। यह बयान उस समय सामने आया जब ईरान और इजराइल के बीच हमले तेज हो गए हैं और अमेरिका भी इस संकट में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
रायसीना डायलॉग में ईरान का कड़ा रुख
एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के उप-विदेश मंत्री ने तीखा बयान देते हुए कहा कि उनका देश किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर युद्ध थोपा गया तो देश आखिरी गोली तक लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने अमेरिकी राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका दूसरे देशों के नेतृत्व का फैसला नहीं कर सकता।
शिराज पर हमला, 20 लोगों की मौत
ईरान के शिराज शहर में हुए हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत की खबर है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक हमले में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। इस घटना के बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने इजराइल और अमेरिका से जुड़े एक ड्रोन को मार गिराया है। इसके अलावा ईरानी सेना ने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई विदेशी जहाज फंस गए हैं, जिनमें फ्रांस के 52 जहाज भी शामिल बताए जा रहे हैं।
क्षेत्र में बढ़ता डर और पलायन
तनाव बढ़ने के साथ ही मिडिल ईस्ट के कई शहरों में भय का माहौल बन गया है। दुबई के कई बाजारों में लोगों की भीड़ कम हो गई है और कई जगहों पर दुकानें खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं लेबनान की राजधानी बेरूत से भी लोगों के पलायन की खबरें सामने आ रही हैं।
इटली की संसद में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और अमेरिकी नीतियों का विरोध किया गया है।
IRGC की चेतावनी
ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर हमले जारी रहे तो उन्हें “दर्दनाक जवाब” दिया जाएगा।
रिपोर्टों के मुताबिक हालिया हमलों में ईरान के छह मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए गए हैं। इसके बावजूद ईरान का कहना है कि वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है।
युद्ध का बढ़ता आर्थिक असर
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले लगभग 100 घंटों में इस संघर्ष से जुड़े सैन्य अभियानों पर अमेरिका को करीब 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया भर के देश इस संकट को लेकर चिंतित हैं और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं।








