विधानसभा चुनाव के एक साल बाद BJP का मेगा प्लान, सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी पार्टी
Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव के एक साल पूरे होने के बाद अब प्रदेश भाजपा संगठन को नई धार देने और कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतारने की तैयारी में जुट गई है। नए साल के पहले ही सप्ताह में भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन के जरिए सरकार को घेरने जा रही है। इस आंदोलन का मुख्य फोकस नगर निकाय चुनाव में देरी और अफसरशाही के बढ़ते प्रभाव पर रहेगा।
नगर निकाय चुनाव को लेकर ‘हल्ला बोल’, 5 से 8 जनवरी तक प्रदर्शन
नगर निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित रहने को भाजपा ने बड़ा जनमुद्दा बनाने का फैसला किया है। प्रदेश भाजपा 5 जनवरी से 8 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी 49 नगर निकायों के कार्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन करेगी। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता:
- नगर निगम और नगर परिषद कार्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे
- राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेंगे
- निकाय चुनाव शीघ्र कराने की मांग उठाएंगे
प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि राज्य में अफसरशाही पूरी तरह हावी हो चुकी है। चुने हुए जनप्रतिनिधियों—मेयर, पार्षद और उपाध्यक्ष—के अभाव में नगर निकायों में मनमानी और भ्रष्टाचार बढ़ गया है।
अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि का मुद्दा
भाजपा का आरोप है कि नगर निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के न होने से फैसले जनता के हित में नहीं हो पा रहे हैं।
पार्टी इस आंदोलन के जरिए सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने और चुनाव कराने का दबाव बनाएगी।
‘जी राम जी’ योजना का घर-घर प्रचार
आंदोलन के साथ-साथ भाजपा केंद्र सरकार की योजनाओं को भी जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।
8 जनवरी से पार्टी कार्यकर्ता मंडल स्तर पर ‘जी राम जी’ योजना के प्रचार में जुटेंगे। प्रदेश नेतृत्व ने सभी जिला इकाइयों को इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस अभियान में:
- प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी
- वरिष्ठ नेता और सांसद
- विधायक और संगठन पदाधिकारी
अलग-अलग क्षेत्रों में जनसंपर्क करेंगे।
संगठन विस्तार: जिलाध्यक्षों की सूची पर सस्पेंस
भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए नए जिलाध्यक्षों की सूची लगभग तैयार है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक:
- 24 जिलों के नामों पर सहमति बन चुकी है
- सिमडेगा, धनबाद और चतरा जिलों में पेंच फंसा हुआ है
केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलते ही किसी भी वक्त जिलाध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है।
सियासी संकेत
राज्यव्यापी आंदोलन, योजनाओं का प्रचार और संगठनात्मक नियुक्तियां साफ संकेत दे रही हैं कि झारखंड भाजपा 2026 को पूरी तरह राजनीतिक मोर्चाबंदी का वर्ष बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ चुकी है।








