नीतीश कुमार: 7 इस्तीफों और 10 बार मुख्यमंत्री बनने की अद्भुत राजनीतिक यात्रा
कुमार अमित मुनादी Live: बिहार की राजनीति में यदि किसी नाम ने दो दशक से अधिक समय तक सत्ता, रणनीति और नेतृत्व की दिशा तय की है, तो वह नाम है — नीतीश कुमार। देश में शायद ही कोई ऐसा नेता है जो 7 बार इस्तीफा देने के बाद भी 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सत्ता के केंद्र में बना रहा हो। यह यात्रा केवल राजनीतिक बदलावों की नहीं, बल्कि उस कौशल, सामंजस्य और लचीलेपन की कहानी है जिसने नीतीश कुमार को भारत के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में शामिल कर दिया।
राजनीतिक शुरुआत और एक विकल्प का उदय
नीतीश कुमार की राजनीति की जड़ें 70 के दशक के जेपी आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। यह वह दौर था जब बिहार में सामाजिक-राजनीतिक चेतना चरम पर थी। लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार दोनों इसी आंदोलन से निकले, लेकिन आगे चलकर दोनों की राहें अलग—अलग हो गईं। 90 के दशक में नीतीश ने खुद को लालू यादव के विकल्प के रूप में तैयार किया। धीरे-धीरे वे बिहार की राजनीति में “विकासवादी सोच वाले नेता” के रूप में पहचाने जाने लगे और वहीं से सत्ता की ओर उनका सफर शुरू हुआ।
2000: पहली बार मुख्यमंत्री, पहली बार इस्तीफा
मार्च 2000 में नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण सिर्फ 7 दिन में पद छोड़ना पड़ा। यह पहला इस्तीफा था—और इसी ने उनके राजनीतिक सफर को नए मोड़ दिए। कमज़ोर शुरुआत के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी; बल्कि इसे भविष्य की तैयारी का समय बना लिया।
2005–2010: बिहार में ‘नीतीश मॉडल’ की मजबूत पकड़
नवंबर 2005 में वे NDA के नेतृत्व में सत्ता में आए। अगले पाँच वर्षों में बिहार ने सड़क, शिक्षा, क़ानून व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण में नए कीर्तिमान स्थापित किए। 2010 में उन्हें शानदार जनसमर्थन मिला और वे एक बार फिर मुख्यमंत्री बने—यह उनका सबसे स्थिर और स्वीकार्य कार्यकाल माना जाता है।
2013: नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी और बड़ा राजनीतिक मोड़
2013 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार घोषित किया। नीतीश कुमार ने इस निर्णय से असहमति जताते हुए NDA छोड़ दिया और तीसरी बार इस्तीफा दे दिया। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन हालात कुछ ही महीनों में उनके खिलाफ हो गए और नीतीश को फिर सत्ता में लौटना पड़ा।
2014 की हार और पांचवां इस्तीफा
2014 लोकसभा चुनाव में जेडीयू सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई। हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने 5वां इस्तीफा दे दिया और फिर से अपनी रणनीति को दुरुस्त किया।
2015: महागठबंधन की ऐतिहासिक जीत
लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर नीतीश कुमार ने 2015 में जोरदार वापसी की। लेकिन गठबंधन में विचारों के टकराव बढ़ते गए।
2017: तेजस्वी यादव विवाद और एक और इस्तीफा
तेजस्वी यादव के खिलाफ CBI मामले पर कार्रवाई नहीं होने के कारण नीतीश ने एक और इस्तीफा दिया, और तुरंत बाद भाजपा के समर्थन से वापस मुख्यमंत्री बन गए। इस निर्णय ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया।
2022–2023: फिर विपक्ष, फिर NDA में वापसी
2022 में नीतीश ने एक बार फिर NDA छोड़ा और महागठबंधन में आ गए। लेकिन सिर्फ आठ महीने बाद 2023 में उन्होंने एक और राजनीतिक पलटी मारी और फिर से भाजपा के साथ सत्ता में लौट आए। इन दो वर्षों में उन्होंने दो और इस्तीफे देकर भारतीय राजनीति की सबसे अनोखी वापसी का उदाहरण प्रस्तुत किया।
2025: NDA की प्रचंड जीत और दसवीं बार मुख्यमंत्री
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA गठबंधन को भारी जीत मिली। और नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। यह बताता है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, नीतीश कुमार ने हमेशा खुद को राजनीति के केंद्र में बनाए रखने की क्षमता सिद्ध की है।
नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली
नीतीश कुमार को अक्सर “यू-टर्न मास्टर” कहा जाता है, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक व्यावहारिक, समझदार और रणनीतिक नेता मानते हैं। उनकी राजनीति की खासियत है। सही समय पर निर्णय लेना, गठबंधन की राजनीति को समझना और खुद को जनता के विकल्प के रूप में बनाए रखना।
नीतीश कुमार का सफर बताता है कि सत्ता में बने रहने से ज्यादा महत्वपूर्ण है— समय को पढ़ने की क्षमता, परिस्थितियों का आकलन और जनता का विश्वास। उन्होंने इन तीनों को मिलाकर अपने राजनीतिक करियर को ऐसी ऊंचाई दी है कि आज वे भारत की राजनीति में सबसे अनोखे और प्रभावशाली नेताओं में शामिल है।








