राज्यसभा में PM मोदी ने रिटायर होने वाले सांसदों को दी विदाई, 37 सदस्य होंगे विदा
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में उन सांसदों को विदाई दी, जिनका कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने जा रहा है। इस दौरान उन्होंने संसदीय जीवन, आपसी सम्मान और जनसेवा में सांसदों के योगदान की सराहना की।
बुधवार को उच्च सदन की कार्यवाही की शुरुआत उन सदस्यों को विदाई देने के साथ हुई, जिनका कार्यकाल अप्रैल और जुलाई के बीच समाप्त होगा। जानकारी के अनुसार, 10 राज्यों के कुल 37 सांसद आने वाले महीनों में राज्यसभा से रिटायर होने वाले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यसभा में कई विषयों पर चर्चा होती है और इस दौरान खट्टे-मीठे पल भी आते हैं, लेकिन विदाई के समय हर सदस्य अपने साथियों के प्रति सम्मान का भाव रखता है। उन्होंने कहा कि जो सदस्य आज रिटायर हो रहे हैं, उनमें से कुछ फिर इस सदन में लौट सकते हैं, जबकि कुछ अन्य तरीकों से जनता की सेवा जारी रखेंगे।
वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में लंबे संसदीय अनुभव वाले कई नेताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एचडी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे वरिष्ठ सदस्यों ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा संसदीय कार्यों में बिताया है।
पीएम मोदी ने कहा कि नए सदस्यों को इन वरिष्ठ नेताओं से सीखना चाहिए कि सदन में समर्पण के साथ कैसे काम किया जाता है, जिम्मेदारियों को कैसे निभाया जाता है और समाज से मिली भूमिका को पूरी निष्ठा से कैसे निभाया जाता है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे संसदीय जीवन का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण होता है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख का विषय है।
हरिवंश नारायण सिंह की भी की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की भी सराहना की। उन्होंने सदन के संचालन और कार्यवाही में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
इस मौके पर राज्यसभा का माहौल भावुक भी रहा, क्योंकि लंबे समय से सदन में सक्रिय रहे कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। संसद के भीतर यह परंपरा रही है कि रिटायर हो रहे सदस्यों को सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है और उनके योगदान को याद किया जाता है।
अप्रैल से जुलाई के बीच पूरा होगा कार्यकाल
राज्यसभा से रिटायर होने वाले सांसदों का कार्यकाल अप्रैल से जुलाई के बीच पूरा होगा। यह बदलाव 10 राज्यों में प्रभाव डालेगा, जहां से नए सदस्यों का चयन किया जाएगा। राजनीतिक रूप से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा की संरचना में हर रिटायरमेंट और नई एंट्री का असर सदन की राजनीतिक ताकत और समीकरणों पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन सिर्फ औपचारिक विदाई नहीं था, बल्कि संसदीय मर्यादा, अनुभव और जनसेवा की परंपरा को सम्मान देने का संदेश भी था।








