रामगढ़ में JEE Mains से पहले बड़ा फर्जीवाड़ा, कंप्यूटर लैब में सिस्टम से छेड़छाड़ की साजिश नाकाम
3 आरोपी गिरफ्तार, 70 कंप्यूटर, फॉर्च्यूनर और मोबाइल जब्त, TCS का नाम लेकर रची गई थी साजिश
रामगढ़: जिले में आगामी 2 अप्रैल 2026 से होने वाली JEE Mains परीक्षा से पहले एक बड़े संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। एक विश्वविद्यालय के कंप्यूटर लैब में घुसकर सिस्टम बदलने और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश रची जा रही थी, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया। इस घटना ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है और परीक्षा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला 29 मार्च 2026 का बताया जा रहा है, जब विश्वविद्यालय के तकनीशियन दिनेश कुमार महतो कुछ बाहरी लोगों के साथ मिलकर लैब में संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से लैब के कंप्यूटर सिस्टम, मॉनिटर और CPU के साथ छेड़छाड़ की।
घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने मौके से 70 कंप्यूटर, एक फॉर्च्यूनर वाहन और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। बरामद सामान से यह अंदेशा और गहरा गया है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी खुद को Tata Consultancy Services (TCS) का कर्मचारी बताकर विश्वविद्यालय में दाखिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें JEE Mains परीक्षा से पहले सिस्टम अपडेट और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने का निर्देश मिला है। इसी बहाने उन्होंने लैब में लगे कंप्यूटर सिस्टम को बदलने और उसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश की।
मामले का खुलासा विश्वविद्यालय के कर्मचारी उमेश कुमार साव की सतर्कता से हुआ। उन्होंने देखा कि कंप्यूटर लैब का दरवाजा खुला हुआ है और कुछ लोग अंदर मॉनिटर खोलकर बाहर खड़ी फॉर्च्यूनर गाड़ी में रख रहे हैं। वहीं गाड़ी से नए मॉनिटर निकालकर लैब में लगाए जा रहे थे। इस गतिविधि ने उन्हें तुरंत संदेह में डाल दिया।
जब उमेश साव ने इस पर आपत्ति जताई, तो मौके पर मौजूद सूरज कुमार ने उन्हें धमकाने की कोशिश की। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया और तुरंत विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। प्रशासन ने बिना देर किए पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
संदेह की पुष्टि के लिए जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने TCS के एरिया हेड से संपर्क किया, तो सच्चाई सामने आ गई। कंपनी की ओर से स्पष्ट कर दिया गया कि इस तरह का कोई भी कार्य या निर्देश जारी नहीं किया गया है। इसके बाद यह साफ हो गया कि आरोपी फर्जी तरीके से कंपनी का नाम इस्तेमाल कर रहे थे और परीक्षा से पहले सिस्टम में गड़बड़ी कर परीक्षा को प्रभावित करने की साजिश रच रहे थे।
पुलिस अब इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह किसी बड़े गिरोह की साजिश है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित करने का काम करता है। जब्त किए गए कंप्यूटर और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे इस नेटवर्क के और भी तार खुल सकते हैं।
इस घटना ने यह भी दिखा दिया है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक JEE Mains की सुरक्षा में कितनी बड़ी सेंध लगाने की कोशिश की गई थी। अगर समय रहते इस साजिश का पर्दाफाश नहीं होता, तो परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर असर पड़ सकता था।
फिलहाल, जिला प्रशासन और पुलिस दोनों ही इस मामले की गहन जांच में जुटे हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।








