ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: 5 दिन तक नहीं होगा ईरान के पावर प्लांट पर हमला
मुनादी लाइव : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले को 5 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया है।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि फिलहाल ईरानी पावर प्लांट्स पर किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोका जाए। यह फैसला हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हुई “सकारात्मक बातचीत” के बाद लिया गया है।
48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, फिर भी तनाव बरकरार
इससे पहले अमेरिका ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी समय सीमा अब खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे।
ईरान ने भी जवाबी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उस पर दबाव बढ़ाया गया, तो वह खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।
डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला, बढ़ी चिंता
युद्ध के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब शुक्रवार रात डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर आई। यह बेस अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य ठिकाना है, जो हिंद महासागर में स्थित है।
हालांकि, ईरान ने इस हमले से आधिकारिक तौर पर इनकार किया है, लेकिन इस घटना ने अमेरिका और यूरोप में चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि यह हमला कथित तौर पर ईरान की घोषित 2000 किमी मारक क्षमता से भी ज्यादा दूरी पर हुआ बताया जा रहा है।
होर्मुज पर ईरान की पकड़, ऊर्जा संकट गहराया
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की मजबूत पकड़ अब वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से दुनिया भर में कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई है।
युद्ध का भयावह असर
इस युद्ध का असर अब बेहद गंभीर होता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- ईरान में 1500 से ज्यादा मौतें
- लेबनान में 1000 से अधिक लोग मारे गए
- इजराइल में 15 लोगों की मौत
- अमेरिकी सेना के 13 जवानों की जान गई
इसके अलावा लाखों लोग बेघर हो चुके हैं और मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है।
क्या बातचीत से निकलेगा हल?
ट्रंप का यह फैसला संकेत देता है कि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, जमीनी हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।








