अविनाश कुमार बने झारखंड के नए मुख्य सचिव, अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार
राज्य सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक बदलाव, नौकरशाही को नई दिशा देने की तैयारी
रांची: झारखंड सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें अपने मौजूदा कार्यों के अलावा अपर स्थानिक आयुक्त, नयी दिल्ली का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को राज्य का विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस फेरबदल को आने वाले समय में सरकार की प्रशासनिक और विकासात्मक दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।
अविनाश कुमार: लंबा प्रशासनिक अनुभव
अविनाश कुमार झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और अब तक ऊर्जा विभाग की कमान संभाल रहे थे। उन्होंने राज्य की बिजली व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम सुधारात्मक कदम उठाए हैं। उनकी छवि एक सख्त और परिणाममुखी अफसर की रही है।
अब मुख्य सचिव के रूप में उन्हें पूरे राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को नेतृत्व देना होगा। राज्य सरकार की प्राथमिकताओं, योजनाओं के क्रियान्वयन और केंद्र के साथ तालमेल की जिम्मेदारी अब उन्हीं के कंधों पर होगी।
अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिली
मुख्य सचिव बनाए जाने के साथ ही अविनाश कुमार को अपर स्थानिक आयुक्त, नयी दिल्ली का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह पद केंद्र और राज्य सरकार के बीच सेतु का काम करता है। दिल्ली में राज्य से जुड़े मामलों की पैरवी और समन्वय इसी दफ्तर के माध्यम से होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दायित्व के साथ अब अविनाश कुमार को न केवल रांची बल्कि दिल्ली दरबार में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। विकास आयुक्त का पद राज्य सरकार की विकास योजनाओं, परियोजनाओं और वित्तीय प्रबंधन से सीधे तौर पर जुड़ा होता है।
अजय कुमार सिंह पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में सक्रिय रहे हैं और कोविड-19 से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने तक में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि विकास आयुक्त के तौर पर वे राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं को गति देंगे।
सरकार का संदेश
इस प्रशासनिक फेरबदल को राज्य सरकार ने बेहद रणनीतिक कदम बताया है। सरकार का मानना है कि इससे शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा आएगी और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्य सचिव और विकास आयुक्त, दोनों पद किसी भी राज्य की नौकरशाही की रीढ़ होते हैं। इन पर नियुक्ति से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि प्रशासनिक कसावट और विकास कार्य, दोनों उसकी प्राथमिकता में हैं।
आने वाले समय की चुनौतियां
मुख्य सचिव और विकास आयुक्त बनने के बाद दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी—
- बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार को और आगे ले जाना।
- केंद्र और राज्य की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन।
- स्वास्थ्य सेवाओं और विकास परियोजनाओं की निगरानी।
- प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह और पारदर्शी बनाना।
झारखंड की आर्थिक चुनौतियों, नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और निवेश को आकर्षित करने की दिशा में इन दोनों अधिकारियों को अपनी रणनीति पर काम करना होगा।








