चतरा में पूर्व उग्रवादियों का खूनी संघर्ष, दो की मौके पर मौत

Kunda Firing

TPC के पूर्व सदस्यों के बीच आपसी रंजिश ने लिया हिंसक रूप, देर रात हुई ताबड़तोड़ फायरिंग

चतरा : झारखंड के चतरा जिले में एक बार फिर उग्रवाद की पुरानी परछाइयों ने खौफनाक शक्ल अख्तियार कर ली है। कुंदा थाना क्षेत्र के गेंद्रा गांव में रविवार देर रात प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के पूर्व सदस्यों के बीच हुए खूनी संघर्ष में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एनआईए के एक अभियुक्त समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

आधी रात शुरू हुआ विवाद, गोलियों की तड़तड़ाहट से कांपा गांव
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात करीब 12 बजे कुंदा थाना क्षेत्र के गेंद्रा गांव निवासी श्याम भोक्ता के घर पर देवेंद्र गंझु अपने कुछ साथियों के साथ पहुंचा। बताया जा रहा है कि किसी पुराने आपसी विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

विवाद इतना बढ़ गया कि देवेंद्र गंझु और उसके साथियों ने कथित तौर पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

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गोलीबारी में दो की मौत, दो की हालत नाजुक
गोलीबारी की इस घटना में श्याम भोक्ता और उनके साले गोपाल गंझु गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, जवाबी कार्रवाई और आपसी संघर्ष के दौरान देवेंद्र गंझु और उसका एक साथी चूरामन गंझु की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

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पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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NIA का अभियुक्त गंभीर रूप से घायल, रिम्स रेफर
घटना में गंभीर रूप से घायल श्याम भोक्ता और गोपाल गंझु को पहले प्रतापपुर और फिर डाल्टनगंज (मेदिनीनगर) ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर दोनों को रिम्स, रांची रेफर कर दिया गया है।

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पुलिस के अनुसार, श्याम भोक्ता एनआईए द्वारा दर्ज एक मामले में अभियुक्त है और उसका आपराधिक इतिहास रहा है।

पूर्व उग्रवादियों की आपसी रंजिश आई सामने
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह पूरा मामला टीपीसी के पूर्व सदस्यों के बीच पुरानी आपसी रंजिश का नतीजा है।
मृतक देवेंद्र गंझु टीपीसी का पूर्व सदस्य था और उस पर 36 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं घायल श्याम भोक्ता भी पहले टीपीसी से जुड़ा रहा है।

इलाके में भारी पुलिस बल तैनात, जांच तेज
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गांव और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना में और कौन-कौन शामिल था और हथियार कहां से आए।

यह घटना बताती है कि भले ही कई उग्रवादी संगठन कमजोर पड़े हों, लेकिन पूर्व उग्रवादियों के बीच की आपसी दुश्मनी अब भी कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। चतरा जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह की घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

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