आठ साल पुराने मुकदमे में राहत, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह समेत सभी आरोपी बरी

Deepika Pandey Singh

आठ साल पुराने केस में आया बड़ा फैसला

झारखंड : झारखंड की सियासत में गुरुवार को एक अहम मोड़ उस समय आया जब न्यायालय ने आठ साल पुराने एक मुकदमे में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 2017 में तात्कालीन भाजपा विधायक अशोक भगत द्वारा दर्ज कराया गया था, जिसमें मंत्री सहित कई अन्य लोगों को नामजद किया गया था।

अशोक भगत ने दर्ज कराया था मुकदमा
मुकदमे की पृष्ठभूमि की बात करें तो वर्ष 2017 में अशोक भगत ने राजनीतिक विवाद के चलते मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और कुछ अन्य लोगों पर मामला दर्ज कराया था। उस समय इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया गया था। आरोप यह लगाए गए थे कि राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी और विरोध के चलते कानून व्यवस्था में बाधा पहुंची थी।

80 वर्षीय बुजुर्ग से लेकर युवा तक आरोपी
इस मामले में खास बात यह थी कि नामजद आरोपियों में 80 वर्षीय एक बुजुर्ग और कई युवा भी शामिल थे। पूरे आठ वर्षों तक यह मामला न्यायालय में चलता रहा। कई तारीखें पड़ीं और आखिरकार अब जाकर सभी आरोपियों को राहत मिली है।

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कोर्ट ने सभी को किया बरी
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस खेमे में इसे ‘सत्य की जीत’ के रूप में देखा जा रहा है।

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मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा, “वर्षों तक लोगों को मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने का यह प्रयास भाजपा की उस राजनीतिक सोच को दर्शाता है, जिसमें विरोधियों को झूठे मामलों में फंसाकर दबाव में लाने की कोशिश की जाती है।” उन्होंने आगे कहा, “सत्य को दबाया जा सकता है, परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने सत्य को पहचाना और हमें न्याय दिया। यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस निर्दोष व्यक्ति की जीत है जिसे वर्षों तक राजनीतिक कारणों से परेशान किया गया।”

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कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर
इस फैसले के बाद झारखंड कांग्रेस में खुशी की लहर दौड़ गई है। कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर दीपिका पांडेय सिंह को बधाई दी और कहा कि यह फैसला झूठ और राजनीतिक प्रतिशोध पर सच्चाई की जीत है।

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भाजपा की ओर से चुप्पी
इस पूरे मामले पर फिलहाल भाजपा नेताओं ने कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के लिए एक बड़ा नैरेटिव बन सकता है।

राजनीतिक प्रतिशोध बनाम न्याय
इस मुकदमे को लेकर पिछले कई वर्षों से आरोप लगते रहे हैं कि इसे राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज कराया गया था। कांग्रेस ने इसे शुरू से ही “फर्जी और राजनीति से प्रेरित मामला” बताया था। न्यायालय का फैसला अब इस राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

चुनावी माहौल में फैसला अहम
इस फैसले को झारखंड में आगामी चुनावी माहौल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह कांग्रेस की तेजतर्रार महिला नेताओं में से एक मानी जाती हैं। बरी होने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

आठ साल पुराने इस मुकदमे में आए कोर्ट के फैसले ने झारखंड की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। दीपिका पांडेय सिंह और अन्य आरोपियों की बरी होने से कांग्रेस को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह फैसला एक झटका माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इस फैसले का चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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