हनुमान प्रसाद पोद्दार पुण्यतिथि: गीता प्रेस के “भाईजी” को श्रद्धांजलि, सेवा और संस्कृति की अमर विरासत

Gita Press

मुनादी लाइव : 22 मार्च को हनुमान प्रसाद पोद्दार की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया जा रहा है। गीता प्रेस गोरखपुर के प्रमुख प्रेरक और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पोद्दार जी को “भाईजी” के नाम से जाना जाता था।

उनकी पुण्यतिथि पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं, जहां लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

एक संत, लेखक और राष्ट्रसेवक का जीवन
हनुमान प्रसाद पोद्दार का जन्म 17 सितंबर 1892 को हुआ था। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, पत्रकार और आध्यात्मिक विचारक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा, धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व सादगी, समर्पण और सेवा का अद्भुत उदाहरण था।

whatsapp channel

Jever News Paper

गीता प्रेस से जुड़ी ऐतिहासिक भूमिका
साल 1923 में गीता प्रेस की स्थापना में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस संस्थान का उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों को सस्ती कीमत पर आम लोगों तक पहुंचाना था। उस समय धार्मिक पुस्तकें महंगी और सीमित उपलब्ध थीं, लेकिन गीता प्रेस ने इस स्थिति को बदल दिया।

the-habitat-ad

पोड्दार जी के मार्गदर्शन में भगवद गीता, रामचरितमानस, वेद, पुराण जैसे ग्रंथ करोड़ों लोगों तक पहुंचे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि धर्म और ज्ञान केवल एक वर्ग तक सीमित न रहकर हर व्यक्ति तक पहुंचे। आज गीता प्रेस विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक प्रकाशन संस्थान बन चुका है, जिसकी नींव में पोद्दार जी की दूरदृष्टि और तपस्या शामिल है।

resizone elanza

‘कल्याण’ पत्रिका से विचारों की क्रांति
सन 1927 में उन्होंने ‘कल्याण’ मासिक पत्रिका की शुरुआत की। यह पत्रिका आज भी प्रकाशित हो रही है और धार्मिक, सामाजिक व नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दे रही है। ‘कल्याण’ के माध्यम से रामायण, महाभारत और पुराणों के विचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया, जिससे आम जन भी इन ग्रंथों को समझ सके।

Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

यह पत्रिका केवल धार्मिक सामग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन जीने की कला, नैतिकता और समाजिक मूल्यों को भी मजबूत करने का माध्यम बनी।

स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय योगदान
पोड्दार जी केवल आध्यात्मिक क्षेत्र के ही व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि वे स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक व्यक्ति एक साथ आध्यात्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को निभा सकता है।

समाज और संस्कृति के लिए समर्पित जीवन
हनुमान प्रसाद पोद्दार ने अपने जीवन में जो कार्य किए, वे आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं। उन्होंने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जीवन जीने का मार्ग बताया। उनके प्रयासों से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ी और भारतीय संस्कृति को नई ऊर्जा मिली।

आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार
22 मार्च 1971 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी सोच और उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी जीवित हैं। गीता प्रेस और ‘कल्याण’ पत्रिका के माध्यम से उनकी विरासत आज भी करोड़ों लोगों तक पहुंच रही है। आज के दौर में जब समाज तेजी से बदल रहा है, ऐसे समय में उनके विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।

हनुमान प्रसाद पोद्दार का जीवन सेवा, समर्पण और संस्कृति के संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी पुण्यतिथि केवल एक स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश भी देती है।

उन्होंने जो ज्ञान और जागरूकता की मशाल जलाई, वह आने वाली पीढ़ियों को भी मार्ग दिखाती रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *