आरोपी गिरफ्तार, फिर भी जारी बम धमकी ईमेल—झारखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
रांची, धनबाद और साहिबगंज कोर्ट को दोबारा धमकी, साइबर जांच एजेंसियों के लिए नई पहेली
मुनादी लाइव : रांची समेत झारखंड के कई जिलों में कोर्ट परिसरों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी धमकी भरे ईमेल लगातार आ रहे हैं, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, धनबाद और साहिबगंज के सिविल कोर्ट को भी एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। रांची सिविल कोर्ट को चौथी बार और साहिबगंज कोर्ट को दूसरी बार ईमेल के जरिए धमकी मिली है।
‘जहरीले गैस बम’ की धमकी से मची अफरा-तफरी
सोमवार को रांची सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजे गए ईमेल में दावा किया गया कि परिसर में 13 जहरीले गैस बम लगाए गए हैं, जिन्हें दोपहर बाद विस्फोट किया जाएगा। ईमेल मिलते ही कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत बम निरोधक दस्ता (BDS) और पुलिस मौके पर पहुंची और घंटों तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
गिरफ्तारी के बाद भी क्यों जारी हैं धमकियां?
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने हाल ही में श्रीनिवास लुइस को गिरफ्तार किया था, जिसने पहले देशभर में ईमेल के जरिए बम धमकी भेजने की बात स्वीकार की थी। लेकिन गिरफ्तारी के 9 दिन बाद ही एक बार फिर झारखंड के कोर्टों को धमकी मिलने से जांच एजेंसियां हैरान हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार धमकी भरे ईमेल तमिलनाडु से भेजे जाने की आशंका है और शक जताया जा रहा है कि लुइस का कोई परिचित इसमें शामिल हो सकता है।
डार्क वेब और VPN से बढ़ी मुश्किल
जांच में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर धमकी भरे ईमेल: VPN (Virtual Private Network) डार्क वेब के जरिए भेजे जा रहे हैं, जिससे असली लोकेशन और पहचान छुप जाती है। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार:
- केवल IP एड्रेस से आरोपी तक पहुंचना मुश्किल
- कई बार सर्वर विदेशों में होते हैं
- जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी होता है
इसी वजह से पुलिस की जांच प्रक्रिया धीमी पड़ रही है।
पहले भी मिल चुकी हैं कई धमकियां
- 6 फरवरी: रांची सिविल कोर्ट को पहली धमकी
- 28 फरवरी: दोबारा कोर्ट को ईमेल
- 12 फरवरी: समाहरणालय को उड़ाने की धमकी
- 6 मार्च: पासपोर्ट ऑफिस को धमकी
- अब फिर 6 अप्रैल: तीन शहरों के कोर्ट निशाने पर
हर बार BDS और पुलिस को घंटों जांच करनी पड़ती है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।
पुलिस और एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
फिलहाल झारखंड पुलिस, साइबर टीम और गृह मंत्रालय (MHA) की एजेंसियां इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हैं। लेकिन लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल
आखिर आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी धमकी कौन दे रहा है? क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?








