झारखंड कैडर IPS संपत्ति खुलासा: 125 में से 117 अधिकारियों ने सौंपा रिटर्न
Ranchi : झारखंड कैडर के आईपीएस अधिकारियों की अचल संपत्ति को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। कुल 125 आईपीएस अधिकारियों में से 117 अधिकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी अचल संपत्ति (Immovable Property Return – IPR) का विवरण सौंप दिया है। दाखिल रिटर्न के अनुसार, अधिकतर अधिकारियों की संपत्तियां पूर्व वर्षों में अर्जित की गई हैं, जबकि वर्ष 2025 में केवल 10 आईपीएस अधिकारियों ने नई अचल संपत्ति खरीदी है।
2025 में संपत्ति खरीदने वाले 10 IPS अधिकारी
रिटर्न के अनुसार, वर्ष 2025 में जिन अधिकारियों ने नई संपत्ति खरीदी, उनमें शामिल हैं:
- अनिल पाल्टा (1990 बैच) – पश्चिम बंगाल के पूर्वा वर्द्धमान जिले के जमालपुर क्षेत्र में 198 डिसमिल जमीन, कीमत ₹4.50 लाख
- आशीष बत्रा (1997 बैच) – पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर में 504 वर्गयार्ड का आवासीय प्लॉट, कीमत ₹4.33 करोड़
- अजय लिंडा (2008 बैच) – रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र के डोरियाटोली में 14.1 डिसमिल जमीन, कीमत ₹32.43 लाख
- अश्विनी कुमार सिन्हा (2010 बैच) – रांची के नगड़ी स्थित सुगदा में जमीन, कीमत ₹7 लाख
- शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल (2010 बैच) – रांची के कांटाटोली स्थित वासुदेव रेसिडेंसी में फ्लैट, कीमत ₹16.66 लाख
- आनंद प्रकाश (2012 बैच) – रांची के अशोक नगर, अरगोड़ा में तेजस्वी अपार्टमेंट में फ्लैट, कीमत ₹55 लाख
- पूज्य प्रकाश (2016 बैच) – रांची के पिठोरिया, सुतियांबे में 34 डिसमिल जमीन, कीमत ₹7.82 लाख
- राजकुमार मेहता (2016 बैच) – रांची के सुगदा में 11.8 डिसमिल जमीन, कीमत ₹3.50 लाख
- सहदेव साव (2016 बैच) – गिरिडीह के खोरीमहुआ में 40 डिसमिल जमीन, कीमत ₹3.30 लाख
- सौरभ (2016 बैच) – वैशाली जिले के मनीहारी में दादी के नाम पर जमीन, कीमत ₹15 लाख
पूर्व वर्षों में खरीदी गई प्रमुख संपत्तियां
इसके अलावा कई आईपीएस अधिकारियों ने यह भी बताया कि उनकी अचल संपत्ति पहले के वर्षों में खरीदी गई थी। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- प्रशांत सिंह (1992 बैच) – वर्ष 2024 में रांची के अशोक नगर में ₹2.25 करोड़ की आवासीय जमीन
- मनीलाल मंडल (2011 बैच)
- प्रभात कुमार (2014 बैच)
- सरोजनी लकड़ा (2014 बैच)
- पितांबर सिंह खेरवार (2017 बैच)
- राकेश रंजन (2017 बैच)
- नाजिश उमर अंसारी (2023 बैच)
- शुभम मीणा (2023 बैच)
- विपिन दुबे (2023 बैच)
पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम
गृह मंत्रालय को सौंपे गए इन रिटर्न को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नियमों के तहत सभी अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के लिए समय-समय पर संपत्ति विवरण देना अनिवार्य है। इस रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि 2025 में नई संपत्ति खरीदने वाले अधिकारियों की संख्या सीमित रही है।




