झारखंड में जनवरी में बन सकती है शहर की सरकार, ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद निकाय चुनाव का रास्ता साफ
रांची : झारखंड में पिछले ढाई वर्षों से लंबित नगर निकाय चुनाव को लेकर अब बड़ी खबर सामने आई है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने बहुप्रतीक्षित “ट्रिपल टेस्ट” की फाइनल रिपोर्ट शुक्रवार को नगर विकास विभाग को सौंप दी है। आयोग के सदस्य नंदकिशोर मेहता ने इसकी पुष्टि की है। इसके साथ ही, राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर अलका तिवारी की नियुक्ति भी हो चुकी है। इन दोनों प्रक्रियाओं के पूरे होने के बाद अब राज्य में नगर निकाय चुनाव का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
दिसंबर-जनवरी में हो सकते हैं निकाय चुनाव
नगर विकास विभाग के सूत्रों के मुताबिक, सरकार दिसंबर 2024 के अंत या जनवरी 2025 के शुरुआती सप्ताह तक चुनाव कराने की तैयारी में है।हालांकि कुछ प्रक्रियाएं अभी शेष हैं। विभाग अब इस ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट को कार्मिक, विधि और वित्त विभागों से समीक्षा के लिए भेजेगा। इनकी स्वीकृति मिलने के बाद रिपोर्ट को कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसे राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपा जाएगा।
चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करेगा और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अनुमान है कि नवंबर मध्य तक सारी तैयारी पूरी हो जाएगी और दिसंबर-जनवरी के बीच मतदान संभव हो पाएगा।
48 नगर निकायों पर आधारित है रिपोर्ट
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस रिपोर्ट के लिए झारखंड के सभी 48 नगर निकायों में डोर-टू-डोर सर्वे कराया था।
सर्वे में प्रत्येक निकाय में पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या का अनुपात तय किया गया है।
रिपोर्ट की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने यह काम संत जेवियर कॉलेज, रांची को सौंपा था। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने 21 अगस्त को आयोग अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव को फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी।
इस रिपोर्ट में प्रत्येक निकाय के स्तर पर ओबीसी जनसंख्या प्रतिशत, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण की स्थिति का ब्योरा शामिल है, जो चुनाव में आरक्षण तय करने का आधार बनेगा।
मार्च 2026 तक चुनाव कराना अनिवार्य
राज्य में नगर निकाय चुनाव में देरी को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से कई बार आपत्ति दर्ज की गई थी।
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने मई 2024 में रांची दौरे के दौरान साफ कहा था कि यदि राज्य सरकार मार्च 2026 तक चुनाव नहीं कराती, तो 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत झारखंड को मिलने वाली अनुदान राशि रोक दी जाएगी।
यह चेतावनी राज्य सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय दबाव बनी हुई थी। अब रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार राहत की सांस ले सकती है।
केंद्र से रोकी गई अनुदान राशि भी मिलेगी
जानकारी के अनुसार, चुनाव होने पर केंद्र द्वारा रोकी गई अनुदान राशि फिर से जारी की जाएगी।
यह राशि तीन वित्तीय वर्षों — 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए होगी।
झारखंड को इन वर्षों में क्रमशः 713-713 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से करीब 2000 करोड़ रुपये से अधिक की ग्रांट नहीं मिली थी।
अब चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से उम्मीद है कि यह फंड फिर से राज्य को मिल जाएगा, जिससे शहरी विकास योजनाओं और नागरिक सुविधाओं को गति मिलेगी।
निकाय चुनाव से लौटेगी शहरी राजनीति की हलचल
नगर निकाय चुनाव झारखंड की शहरी राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
इन चुनावों से राज्य के 48 नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में नयी सरकारें बनेंगी।
राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव 2026 विधानसभा चुनाव से पहले जनमत का परीक्षण भी होगा।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस और आजसू पार्टी (AJSU) ने अब तैयारी तेज कर दी है।
प्रत्येक पार्टी अपने नगर स्तर पर संगठन सुदृढ़ करने और संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में जुटी है।
ओबीसी आरक्षण पर रहेगा फोकस
ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट की सबसे अहम कड़ी पिछड़ा वर्ग को मिलने वाला आरक्षण है।
रिपोर्ट के आधार पर अब तय किया जाएगा कि किन निकायों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण मिलेगा और कितने प्रतिशत सीटें इसके तहत सुरक्षित होंगी।
राज्य में पिछली बार 2018 में हुए निकाय चुनाव के बाद से यह आरक्षण विवादित रहा है।
अब रिपोर्ट की सिफारिशों से इस पर कानूनी और प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
चुनावी सरगर्मी तेज, नगरों में तैयारी शुरू
राज्य निर्वाचन आयोग की नई प्रमुख अलका तिवारी के कार्यभार संभालने के साथ ही आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और बूथ पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है।
नगर निगमों में चुनाव की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क किया गया है।
रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और हजारीबाग जैसे शहरों में राजनीतिक दलों ने पोस्टर अभियान और जनसंवाद कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं।
ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट सौंपे जाने और राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के साथ अब यह स्पष्ट है कि झारखंड में जनवरी 2025 तक शहर की सरकार बन जाएगी। लंबे समय से स्थगित निकाय चुनाव अब अपने अंतिम चरण में हैं।
राज्य की राजनीति और विकास योजनाओं के लिए यह चुनाव न सिर्फ प्रशासनिक रूप से अहम होगा बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी निर्णायक साबित हो सकता है।








