झारखंड निकाय चुनाव 2026: शाम 5 बजे तक कई शहरों में बढ़ी वोटिंग, रांची सबसे पीछे

Voting Percentage Update

सिमडेगा और रामगढ़ में उत्साह, रांची नगर निगम में वोटिंग रही धीमी

रांची: झारखंड में जारी नगर निकाय चुनाव 2026 के तहत सुबह 7 बजे शुरू हुआ मतदान शाम 5 बजे तक कई शहरी क्षेत्रों में तेज रफ्तार पकड़ता नजर आया। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, छोटे नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में मतदाताओं का उत्साह ज्यादा दिखा, जबकि राजधानी रांची नगर निगम में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा।

चुनाव आयोग के मुताबिक, दोपहर बाद कई बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। खासकर कोल्हान और उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के कई शहरों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। प्रशासन ने अधिकांश जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण होने का दावा किया है।

किस शहर में कितना मतदान (शाम 5 बजे तक)

  • हजारीबाग नगर निगम: 49.93%
  • सिमडेगा नगर पालिका: 67.83%
  • रामगढ़ नगर परिषद: 65.63%
  • पलामू नगर निगम: 57.41%
  • चाईबासा नगर परिषद: 61.05%
  • चक्रधरपुर नगर परिषद: 57.95%
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वहीं राजधानी रांची नगर निगम क्षेत्र में मतदान की रफ्तार धीमी रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां दोपहर बाद भी वोटिंग करीब 34.16 प्रतिशत के आसपास ही रही, जो राज्य के अन्य निकायों की तुलना में कम मानी जा रही है।

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छोटे शहरों में ज्यादा दिखा उत्साह
सिमडेगा, रामगढ़ और चाईबासा जैसे क्षेत्रों में मतदाताओं की सक्रियता ने मतदान प्रतिशत को तेजी से ऊपर पहुंचाया। स्थानीय मुद्दों—सड़क, नाली, पेयजल और सफाई व्यवस्था—को लेकर लोगों ने बढ़-चढ़कर वोट डाला। पहली बार मतदान करने पहुंचे युवाओं में भी खास उत्साह देखा गया।

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प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बताया मजबूत
चुनाव को लेकर राज्यभर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कई संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों के अनुसार, कुछ जगहों पर हल्की झड़प और हंगामे की खबरें जरूर आईं, लेकिन समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और मतदान प्रक्रिया बाधित नहीं होने दी गई।

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27 फरवरी को आएंगे नतीजे
48 शहरी निकायों में हुए इस चुनाव में मेयर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पदों के हजारों प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम नहीं बल्कि बैलेट पेपर में कैद हुई है। अब सभी की निगाहें 27 फरवरी को होने वाली मतगणना और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि शहरों की सरकार किसके हाथ में जाएगी।

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