सोना 1.76 लाख से 1 लाख के नीचे? रूस-अमेरिका डील से बाजार में हलचल
मुनादी Live : सोने की कीमतें हाल ही में 10 ग्राम के लिए 1 लाख 76 हजार रुपये तक पहुंच गई थीं। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि सोना 1 लाख रुपये के नीचे भी आ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह रूस और अमेरिका के बीच संभावित डॉलर आधारित व्यापार समझौता माना जा रहा है।
डॉलर बनाम सोना: क्या बदल रहा है समीकरण?
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देश, खासकर BRICS समूह के सदस्य, अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे थे। डॉलर की जगह अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही थी।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2005 में सोने की हिस्सेदारी सिर्फ 4.3% थी, जो 2025 तक बढ़कर 15% हो गई। ब्राजील ने 2025 में 16 टन सोना खरीदा, जबकि उससे पहले चार वर्षों तक उसने कोई खरीदारी नहीं की थी।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद बढ़ते टैरिफ और वैश्विक व्यापार तनाव ने आर्थिक अस्थिरता बढ़ाई। इस अनिश्चित माहौल में केंद्रीय बैंकों ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में प्राथमिकता दी। BRICS देशों के पास अब दुनिया के लगभग 20% गोल्ड रिजर्व होने का अनुमान है।
रूस-अमेरिका डील से क्यों बदलेगा ट्रेंड?
अब यदि रूस और अमेरिका के बीच डॉलर में व्यापार दोबारा मजबूत होता है, तो वैश्विक बाजार में डॉलर पर भरोसा फिर से बढ़ सकता है। इससे देशों को अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत कम महसूस होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब केंद्रीय बैंकों की सोना खरीदने की रफ्तार घटेगी, तो मांग कम होगी और कीमतों पर दबाव पड़ेगा। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड रेट में संभावित गिरावट की चर्चा तेज हो गई है।
क्या भारत में भी घटेंगे दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। हालांकि, भारत में सोने की कीमतें रुपये-डॉलर विनिमय दर, आयात शुल्क और घरेलू मांग जैसे कारकों से भी प्रभावित होती हैं।
फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस-अमेरिका व्यापार संबंध स्थिर होते हैं और डॉलर की मजबूती लौटती है, तो सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे आ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मुद्रा संतुलन इसमें बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आने वाले महीनों में रूस-अमेरिका संबंध और डॉलर की स्थिति पर बाजार की नजर रहेगी।
सोना फिलहाल ऊंचाई से फिसलने के संकेत दे रहा है — अब देखना होगा कि क्या यह सचमुच 1 लाख के नीचे जाता है या फिर कोई नया वैश्विक तनाव इसे फिर से चमका देता है।








