ईरान युद्ध के बीच अमेरिका पर कर्ज का पहाड़, पहली बार 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा राष्ट्रीय कर्ज
मुनादी लाइव : ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अब आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी के दैनिक आंकड़ों के मुताबिक 17 मार्च 2026 तक कुल सार्वजनिक ऋण 39,016,762,910,245.14 डॉलर दर्ज किया गया।
यह वृद्धि अचानक नहीं हुई, लेकिन इसकी रफ्तार ने चिंता बढ़ा दी है। अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज 38 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचा था, जबकि अगस्त 2025 में यह करीब 37 ट्रिलियन डॉलर था। यानी महज कुछ महीनों में कर्ज में करीब 2 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज हुई, और केवल अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच ही इसमें लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ।
फॉक्स बिजनेस और अन्य अमेरिकी रिपोर्टों के मुताबिक यह उछाल सरकार के लगातार ऊंचे खर्च, बजट घाटे और बढ़ती उधारी को दिखाता है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया और यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी सरकार पर रक्षा, कर नीति, आव्रजन और अन्य मदों में भारी खर्च का दबाव बना हुआ है।
युद्ध के संदर्भ में भी यह आंकड़ा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संघर्ष को तेज और सीमित अवधि वाला बताया था, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े युद्ध अभियान की लागत पहले ही अरबों डॉलर तक पहुंच चुकी है, जिससे संघीय वित्तीय दबाव और बढ़ा है।
आर्थिक विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि तेजी से बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज केवल सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका असर आम लोगों पर भी पड़ता है। बढ़ते कर्ज का मतलब है कि सरकार को अधिक ब्याज चुकाना पड़ेगा, जिससे भविष्य में सामाजिक योजनाओं, निवेश और विकास खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। एपी ने सरकारी और बजट विश्लेषकों के हवाले से कहा है कि बढ़ती उधारी का असर उधार लेने की लागत, निवेश, कीमतों और मजदूरी पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका की आर्थिक सेहत को लेकर यह इसलिए भी बड़ा संकेत है, क्योंकि कर्ज की रफ्तार थमती नहीं दिख रही। कुछ विश्लेषणों में यह आशंका जताई गई है कि इसी गति से बढ़ोतरी जारी रही तो अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज आने वाले महीनों में 40 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान युद्ध के बीच अमेरिका अब दोहरी चुनौती से जूझता दिख रहा है। एक ओर सैन्य मोर्चे पर तनाव कम नहीं हो रहा, दूसरी ओर आर्थिक मोर्चे पर कर्ज का बोझ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन की युद्ध और वित्तीय रणनीति अब देश के भीतर भी सवालों के घेरे में आ सकती है।








