देहरादून में गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या का बड़ा खुलासा, छोटे भाई पर सुपारी किलिंग की साजिश का आरोप
Jamshedpur: देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल में हुई गैंगस्टर विक्रम शर्मा की सनसनीखेज हत्या मामले में जांच एजेंसियों को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। शुरुआती जांच के अनुसार इस हत्याकांड की साजिश उसके छोटे भाई अरविंद शर्मा ने ही करोड़ों की संपत्ति विवाद के चलते रची थी। बताया जा रहा है कि पेशेवर शूटरों को सुपारी देकर इस वारदात को अंजाम दिलाया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले जमशेदपुर के डिमना स्थित आशियाना इनक्लेव में प्रभात उर्फ बकरी के घर एक गुप्त बैठक हुई थी। इसी बैठक में चार शूटरों से अरविंद शर्मा की मुलाकात कराई गई और हत्या की पूरी योजना तैयार की गई। सौदा तय होने के बाद शूटरों को करीब 10 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे।
जुलाई 2025 में तैयार हुआ था ‘ब्लूप्रिंट’
जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या की साजिश अचानक नहीं बनी थी। इसकी नींव जुलाई 2025 में जमशेदपुर के मानगो इलाके में पड़ी थी, जहां अरविंद शर्मा अपने पुराने साथी प्रभात से मिला था। इसके बाद विक्रम शर्मा को रास्ते से हटाने की रणनीति तैयार की गई। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, लोकल इनपुट और संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
करोड़ों की संपत्ति बना खून के रिश्ते का दुश्मन
पुलिस की थ्योरी के अनुसार बिष्टुपुर और देहरादून में स्थित करोड़ों की संपत्ति इस हत्या की मुख्य वजह बनी। पुराने मामलों के अनुसार 1998 में ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या के बाद परिवार के भीतर संपत्ति और कारोबार को लेकर विवाद गहराता गया। जांच में सामने आया है कि संपत्ति पर नियंत्रण को लेकर दोनों भाइयों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था, जिसने आखिरकार इस खूनी साजिश को जन्म दिया।
पेशेवर शूटरों ने की थी रेकी
पुलिस के मुताबिक, शूटर झारखंड से फ्लाइट के जरिए उत्तराखंड पहुंचे थे और कई दिनों तक सिल्वर सिटी मॉल तथा विक्रम शर्मा की गतिविधियों की रेकी की गई। वारदात के दिन सुबह करीब 10:10 बजे जैसे ही विक्रम शर्मा जिम से बाहर निकले, पहले से घात लगाए दो शूटरों ने बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। सिर में लगी गोलियों से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना को अंजाम देने के बाद शूटर पैदल मॉल से बाहर निकले और तीसरे साथी के साथ बाइक पर सवार होकर फरार हो गए। पुलिस ने सीसीटीवी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीन हमलावरों की पहचान जमशेदपुर के बागबेड़ा और जुगसलाई इलाके के अपराधियों के रूप में की है, जिनका संबंध एक कुख्यात गैंग से बताया जा रहा है।
किराए के वाहन से पहुंचे थे शूटर
जांच में यह भी सामने आया है कि शूटरों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए किराए के वाहन का इस्तेमाल किया। हरिद्वार रेलवे स्टेशन के पास से स्कूटी और बाइक किराए पर ली गई थी और झारखंड के पते वाले आधार कार्ड जमा कराए गए थे। पुलिस अब इस पूरे कॉन्ट्रैक्ट किलिंग नेटवर्क के आर्थिक और आपराधिक लिंक खंगाल रही है।
फिलहाल देहरादून और झारखंड पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच में जुटी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।








