बिहार चुनाव में झामुमो की सक्रियता तेज, सीट शेयरिंग पर हेमंत सोरेन खुद करेंगे वार्ता
पटना में आरजेडी नेताओं के साथ बैठक के बाद तेज हुई सीट शेयरिंग की चर्चा
झारखंड / बिहार : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। पटना में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई अहम बैठक के बाद झामुमो महासचिव विनोद पांडेय और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार रांची लौट आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बातचीत की पूरी जानकारी दी है। अब सीएम खुद इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं से सीधे वार्ता कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
सीट शेयरिंग पर दो से तीन दिनों में साफ हो सकती है तस्वीर
सूत्रों के मुताबिक, सीट शेयरिंग को लेकर तस्वीर अगले दो से तीन दिनों में साफ हो जाएगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, महागठबंधन में झामुमो को कटोरिया और मनिहारी सीट मिल सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इशारा किया है कि सीटों पर औपचारिक निर्णय जल्द ही होगा। इसके बाद झामुमो अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर प्रचार अभियान भी तेज करेगा।
विनोद पांडेय ने बताया कि पटना में हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने कहा, “हम गठबंधन धर्म का सम्मान करते हैं। बिहार में झामुमो की उपस्थिति महागठबंधन को और मज़बूती देगी।” झामुमो ने बिहार में अपनी संगठनात्मक ताकत के आधार पर सम्मानजनक सीट हिस्सेदारी की मांग की है।
आदिवासी बहुल इलाकों पर झामुमो की नजर
झामुमो का ध्यान उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां संगठनात्मक आधार मजबूत है और आदिवासी समुदाय में पार्टी की गहरी पैठ है। इन सीटों को लेकर पार्टी का मानना है कि वह गठबंधन की जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी झामुमो को चार से पांच सीटें देने पर विचार कर रही है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि झारखंड से सटे बिहार के सीमावर्ती इलाकों में झामुमो की पकड़ मज़बूत है, और इन इलाकों में पार्टी की उपस्थिति से महागठबंधन को बड़ा फायदा हो सकता है।
इन सीटों पर दावेदारी कर रहा है झामुमो
मंगलवार को पटना में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में झामुमो की ओर से महासचिव विनोद पांडेय और मंत्री सुदिव्य कुमार ने हिस्सा लिया। वहीं आरजेडी की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री जयप्रकाश यादव, अब्दुल बारी सिद्दीकी और भोला यादव मौजूद रहे। बैठक में सीट बंटवारे को लेकर प्रारंभिक सहमति बनी।
झामुमो ने जिन सीटों पर दावेदारी की है, उनमें तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, ठाकुरगंज, बांका, रूपौली, चकाई, पीरपैंती, जमालपुर, बनमनखी और रामनगर जैसी सीमावर्ती व आदिवासी बहुल सीटें शामिल हैं।
हेमंत सोरेन खुद करेंगे अंतिम वार्ता
अब सभी की निगाहें हेमंत सोरेन और महागठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री खुद सीटों को लेकर अंतिम वार्ता करेंगे और उसके बाद ही औपचारिक ऐलान होगा। झामुमो नेताओं का कहना है कि सीटों पर जल्द ही अंतिम समझौता होगा और इसके बाद पार्टी जोरदार चुनावी अभियान में उतर जाएगी।
विनोद पांडेय ने कहा, “हमने पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के पदाधिकारियों को संगठन को मज़बूत करने का निर्देश दिया है। पार्टी का लक्ष्य बिहार में गठबंधन को और सशक्त बनाना है।”
बिहार में झामुमो की एंट्री से चुनावी समीकरण में बदलाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो की सक्रियता से बिहार के सीमावर्ती इलाकों में महागठबंधन को मजबूत आधार मिलेगा। आदिवासी और झारखंड से जुड़े मतदाता समूह इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इससे न सिर्फ झामुमो की राजनीतिक उपस्थिति बढ़ेगी बल्कि गठबंधन को भी व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है।
अब देखना यह होगा कि सीट शेयरिंग पर हेमंत सोरेन और महागठबंधन के बीच क्या अंतिम समझौता होता है और झामुमो किन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारता है।








