करंडीह दिसुम जाहेर स्थान में पहुंचीं राष्ट्रपति, ऑल चिकि लिपि शताब्दी समारोह का भव्य समापन
Jamshedpur: झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी विरासत के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण रहा, जब भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जमशेदपुर के करंडीह दिसुम जाहेर स्थान पहुंचीं। वे ऑल चिकि लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

यह भव्य कार्यक्रम ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन और करंडीह दिसुम जाहेर स्थान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आदिवासी समाज के प्रमुख प्रतिनिधि, लेखक, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। पूरे परिसर में संताली संस्कृति, परंपरा और भाषा की जीवंत झलक देखने को मिली।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए सभी वर्गों का सामूहिक योगदान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाषा और लिपि किसी भी समाज की आत्मा होती है, जो उसकी पहचान, इतिहास और चेतना को जीवंत बनाए रखती है। ऑल चिकि लिपि ने संताली समाज को अपनी भाषा को संरक्षित और विकसित करने का सशक्त माध्यम प्रदान किया है।

राष्ट्रपति ने संताली भाषा और ऑल चिकि लिपि के विकास में योगदान देने वाले विद्वानों और समाज के अग्रदूतों को सम्मानपूर्वक याद करते हुए कहा कि आदिवासी भाषाओं और संस्कृतियों का संरक्षण राष्ट्र की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करता है। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। शताब्दी समारोह का समापन आदिवासी समाज की एकता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना के संदेश के साथ हुआ।

करंडीह दिसुम जाहेर स्थान में आयोजित यह आयोजन न केवल ऑल चिकि लिपि की ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव बना, बल्कि झारखंड की आदिवासी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती भी प्रदान करता नजर आया।







