गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल से फूड डिलीवरी सेक्टर में हलचल
मुनादी लाइव डेस्क : देशभर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़े गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल ने फूड टेक और क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है। बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्य परिस्थितियों और 10 मिनट डिलीवरी विकल्प को खत्म करने जैसी मांगों को लेकर गिग वर्कर्स सड़कों पर उतर आए हैं।
गिग वर्कर्स यूनियनों की हड़ताल के बीच फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और स्विगी ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए इंसेंटिव बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि सेवाएं पूरी तरह से ठप न हों।
लाखों गिग वर्कर्स हड़ताल में शामिल
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स का दावा है कि देशभर में लाखों डिलीवरी और ऐप-बेस्ड वर्कर्स इस हड़ताल का हिस्सा बन चुके हैं। यूनियनों के संयुक्त बयान के मुताबिक,
“कल रात तक 1.7 लाख से ज्यादा वर्कर्स ने हड़ताल में भाग लेने की पुष्टि की है, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।”
न्यू ईयर से पहले कंपनियों की बढ़ी मुश्किल
इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब न्यू ईयर ईव के चलते फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाओं की मांग चरम पर रहती है। जोमैटो, स्विगी के साथ-साथ ब्लिंकट, इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी कंपनियों के ऑर्डर डिलीवरी पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
10 मिनट डिलीवरी पर विरोध
गिग वर्कर्स का कहना है कि 10 मिनट डिलीवरी जैसे विकल्प वर्कर्स की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं और उन पर अनावश्यक दबाव डालते हैं। यूनियनों की मांग है कि डिलीवरी टाइम टारगेट को यथार्थवादी बनाया जाए और न्यूनतम गारंटीड भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
कंपनियों ने बढ़ाया इंसेंटिव
हड़ताल के बीच जोमैटो और स्विगी ने डिलीवरी पार्टनर्स को अतिरिक्त इंसेंटिव और बोनस देने की घोषणा की है, ताकि प्लेटफॉर्म पर सक्रिय वर्कर्स की संख्या बनी रहे। हालांकि, यूनियनों का कहना है कि इंसेंटिव अस्थायी समाधान है और स्थायी नीति बदलाव की जरूरत है।
क्या बदलेगा गिग इकोनॉमी का भविष्य?
यह हड़ताल गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों युवाओं के अधिकार, सुरक्षा और वेतन संरचना को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और कंपनियां इन मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।








