ईरान ने चीन से खरीदे 1000 ‘सुसाइड प्लेन’, मध्य-पूर्व में युद्ध का खतरा और बढ़ा
मुनादी लाइव : मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक नई खबर ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Iran ने China से करीब 1000 ‘सुसाइड ड्रोन’ या ‘सुसाइड प्लेन’ खरीदने का समझौता किया है।
बताया जा रहा है कि इन ड्रोन की डिलीवरी अगले कुछ दिनों में हो सकती है। यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान का तनाव United States और Israel के साथ लगातार बढ़ रहा है।
क्या होते हैं ‘सुसाइड प्लेन’
इन ड्रोन को सैन्य भाषा में लोइटरिंग म्युनिशन या कामीकाज़े ड्रोन कहा जाता है।
इनकी खासियत यह है कि:
- ये रिमोट कंट्रोल या जीपीएस से संचालित होते हैं
- लक्ष्य के आसपास मंडराते रहते हैं
- लक्ष्य मिलते ही सीधे टकराकर विस्फोट कर देते हैं
- यानी ये ड्रोन खुद ही हथियार होते हैं और लक्ष्य को नष्ट करने के साथ स्वयं भी नष्ट हो जाते हैं।
तेल के बदले सैन्य सौदे की चर्चा
सूत्रों के अनुसार इस सौदे में भुगतान पारंपरिक मुद्रा में नहीं बल्कि तेल के बदले हथियार के रूप में किया जा सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन को ऊर्जा की बड़ी जरूरत है और ईरान के पास विशाल तेल भंडार है, इसलिए दोनों देशों के बीच इस तरह के रणनीतिक समझौते संभव माने जा रहे हैं।
युद्ध की आशंका और बढ़ी
ईरान द्वारा इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन खरीदने की खबर से मध्य-पूर्व में पहले से चल रहे तनाव को और हवा मिल गई है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन ड्रोन का इस्तेमाल युद्ध में किया गया तो यह संघर्ष को और खतरनाक बना सकता है, क्योंकि ड्रोन युद्ध आधुनिक सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
ड्रोन युद्ध का बढ़ता खतरा
हाल के वर्षों में दुनिया भर के युद्धों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। छोटे लेकिन घातक ड्रोन कम लागत में बड़े सैन्य ठिकानों को भी निशाना बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियार बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
Note: इस तरह की रिपोर्ट्स अक्सर खुफिया और मीडिया स्रोतों पर आधारित होती हैं। किसी भी आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी के सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।








