NIT जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू, छात्रों को दिए सफलता के मूल मंत्र
Saraikela-Jamshedpur: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर का 15वां दीक्षांत समारोह सोमवार को संस्थान परिसर में भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और राज्य सरकार के मंत्री दीपक बिरुवा भी समारोह में मौजूद रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान करते हुए कहा कि यह क्षण केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि देश के प्रति नई जिम्मेदारियां और संकल्प लेने का समय भी है। उन्होंने कहा कि पिछले 65 वर्षों से NIT जमशेदपुर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देता आ रहा है और यहां से निकले विद्यार्थी देश-विदेश में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
अपने प्रेरक संबोधन में राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को “नेशन बिल्डर्स” की संज्ञा देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने की जगह नहीं होते, बल्कि वे ऐसी बौद्धिक प्रयोगशालाएं हैं जहां भविष्य की सोच आकार लेती है। उन्होंने युवाओं से नवाचार, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए एम.एससी. (भौतिकी) के छात्र कृष्णाशिष मंडल और बी.टेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) के छात्र प्रियांशु राज को राष्ट्रपति के करकमलों से स्वर्ण पदक (Gold Medal) प्रदान किया गया। दोनों छात्रों की इस उपलब्धि पर पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने NIT जमशेदपुर के स्टार्टअप इकोसिस्टम और इन्क्यूबेशन सेंटर की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सस्टेनेबल एनर्जी, वेस्ट मैनेजमेंट और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में बहु-हितधारक (Multi-stakeholder) दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, ताकि तकनीक समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा सके।
इस अवसर पर संस्थान द्वारा स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर और उद्योगपति रबींद्र कुमार बेहरा को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से सम्मानित किए जाने पर भी राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की।
समारोह का समापन राष्ट्र निर्माण में तकनीकी शिक्षा की भूमिका को और सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ। NIT जमशेदपुर का यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए न केवल एक उपलब्धि का पड़ाव रहा, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रेरणास्रोत भी बना।








