सीताराम मारू जन्म शताब्दी समारोह में सजी श्रद्धा, सेवा और संस्कार की मिसाल

Sitaram maroo

मुनादी लाइव विशेष : समाजसेवा, संस्कृति और पत्रकारिता के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले स्वर्गीय सीताराम मारू की जन्म शताब्दी के अवसर पर शनिवार को रांची में भव्य आयोजन हुआ।
इस अवसर पर राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व सांसद कड़िया मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त, और स्वामी तेजोमयानंद सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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राज्यपाल ने जारी किया सीताराम मारू पर स्मारक डाक टिकट
राजभवन, रांची में आयोजित विशेष समारोह में भारतीय डाक विभाग की ओर से सीताराम मारू के जीवन और योगदान पर आधारित स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया गया। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा –

“सीताराम मारू मां भारती के ऐसे तपस्वी और कर्मठ सपूत थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज, संस्कृति और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका जीवन अनुकरणीय है। भारतीय डाक विभाग द्वारा उनके सम्मान में डाक टिकट जारी करना उनके योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि है।”

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राज्यपाल ने यह भी कहा कि मारू जी ने नागरमल मोदी सेवा सदन, मारवाड़ी सहायक समिति, और संस्कृत भारती जैसी संस्थाओं के माध्यम से झारखंड में शिक्षा, चिकित्सा और संस्कृति के उत्थान में अतुलनीय योगदान दिया।

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स्वामी तेजोमयानंद का प्रेरणादायक संदेश
समारोह में चिन्मय मिशन के ग्लोबल प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद ने कहा —

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“संसार का हर प्राणी अपने लिए जीता है, परंतु मनुष्य ही ऐसा जीव है जो दूसरों के लिए जी सकता है। यही सीताराम मारू की असली पहचान थी — सेवा, समर्पण और संस्कार। उन्होंने अपने जीवन से सिखाया कि आत्मज्ञान और समाज सेवा, दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।”

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उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य अगर दुनिया की हर वस्तु को जान सकता है, तो उसे स्वयं को भी जानने का प्रयास करना चाहिए। आत्मज्ञान ही समाज कल्याण की मूल प्रेरणा बन सकता है।

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“सीताराम मारू व्यक्ति नहीं, एक संस्था थे” — कड़िया मुंडा
पूर्व सांसद कड़िया मुंडा ने भावुक होते हुए कहा —

“सीताराम मारू कोई व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक जीवंत संस्था थे। उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। समाज सेवा उनके जीवन का मूल मंत्र था। ऐसे लोग अब बहुत कम रह गए हैं जो सोचते ही नहीं, बल्कि करते भी हैं।”

पत्रकारिता से संस्कृति तक — हर क्षेत्र में योगदान
वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त ने कहा कि मारू जी ने न केवल पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई, बल्कि उन्होंने ‘संस्कृत भारती’ के माध्यम से भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा —

“सीताराम मारू हर क्षेत्र के लोगों को साथ लेकर चलते थे। उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया। पत्रकारिता, शिक्षा और समाजसेवा — हर मोर्चे पर उनका काम याद किया जाएगा।”

सामाजिक सेवा में अग्रणी रहे सीताराम मारू
पूर्व सांसद अजय मारू, जो सीताराम मारू के पुत्र हैं, ने कहा —

“मेरे पिता के जीवन का दर्शन तीन शब्दों में सिमटा था — काम, काम और सिर्फ काम। उन्होंने कभी नाम या पद के लिए काम नहीं किया। उनका लक्ष्य हमेशा समाज का उत्थान रहा।”

अजय मारू ने बताया कि मारू परिवार के सदस्य मुंबई, जयपुर, नागपुर सहित देशभर से रांची पहुंचे, ताकि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बन सकें। कार्यक्रम का मंच संचालन सीए विनोद कुमार गढ़यान ने किया।

रांची श्री श्याम मंदिर में 174वां श्री श्याम भंडारा समर्पित
सीताराम मारू की जन्म शताब्दी के अवसर पर श्री श्याम मित्र मंडल द्वारा हरमू रोड स्थित श्री श्याम मंदिर में 174वां श्री श्याम भंडारा आयोजित किया गया।
मंडल के अध्यक्ष गोपाल मुरारका, महामंत्री गौरव अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मनोज खेतान, और उपाध्यक्ष अशोक लोहिया ने बताया कि इस अवसर पर भजन संध्या, प्रसाद वितरण, और गौ सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कोलकाता निवासी रामावतार भाला व गीता देवी भाला ने मंदिर के आचार्यों को भोग प्रसाद अर्पित किया।

रविवार को बुंडू में हुआ संस्कृत भारती का विशेष आयोजन
रविवार को प्रधान नगर, बुंडू स्थित सूर्य उपासना भवन में संस्कृत भारती के तत्वावधान में सीताराम मारू जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ ।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा उपस्थित रहें। कार्यक्रम में बुंडू, तमाड़ और पंच परगना क्षेत्र के गणमान्य लोग, संस्कृत भारती के आचार्यगण, और बड़ी संख्या में छात्र- छात्राओं ने भाग लिया ।

राष्ट्र निर्माण में आदर्श बने सीताराम मारू
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने वक्तव्य में कहा कि सीताराम मारू का जीवन राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा —

“सीताराम मारू ने अपने कर्म से यह साबित किया कि सेवा और संस्कृति, दोनों ही भारत की आत्मा हैं। उनका जीवन समाज के लिए समर्पण का उदाहरण है।”

समापन में दी गई श्रद्धांजलि
समारोह के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों ने सीताराम मारू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

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