वाराणसी में आयोजित अखिल भारतीय विवाह परिचय सम्मेलन, कई राज्यों के परिवारों ने लिया भाग
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक शहर वाराणसी में अखिल भारतीय स्तर का एक भव्य विवाह परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए परिवारों ने भाग लेकर इसे एक व्यापक सामाजिक मंच का रूप दिया।
यह सम्मेलन न केवल वैवाहिक परिचय का मंच बना, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी संवाद को भी मजबूत करने का माध्यम साबित हुआ।
कई राज्यों से पहुंचे प्रतिभागी
इस सम्मेलन में झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र (मुंबई, नागपुर), असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से परिवार शामिल हुए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों और युवाओं ने भाग लिया, जहां उन्होंने आपसी परिचय और संवाद के माध्यम से रिश्तों की संभावनाओं पर चर्चा की।

आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले लोग
इस भव्य आयोजन का संचालन सामाजिक कार्यकर्ताओं और आयोजकों की एक सक्रिय टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में प्रमुख रूप से राजेंद्र प्रसाद राजेश गुप्ता मधेशिया, रंजित गुप्ता, राजीव गुप्ता, आलोक गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वहीं झारखंड से अर्चना गुप्ता और दिनेश कुमार ने रांची कॉर्डिनेटर के रूप में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।
व्यापारियों और समन्वयकों की सक्रिय भागीदारी
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए व्यापारियों और क्षेत्रीय कॉर्डिनेटर्स की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। इन सभी ने मिलकर कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में अहम योगदान दिया।
सोना तालाब पांडेपुर में हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम वाराणसी के सोना तालाब, पांडेपुर क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक और सामाजिक मूल्यों का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे कार्यक्रम में शामिल लोगों को एक सकारात्मक और पारिवारिक वातावरण मिला।

शहनाई पत्रिका का हुआ विमोचन
इस अवसर पर “शहनाई” पत्रिका का विमोचन भी किया गया, जो इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण रहा। पत्रिका के माध्यम से वैवाहिक संबंधों, सामाजिक गतिविधियों और समुदाय से जुड़े विषयों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
सामाजिक एकता का बना मंच
यह विवाह परिचय सम्मेलन केवल रिश्तों के लिए एक मंच नहीं रहा, बल्कि विभिन्न राज्यों और समुदायों के लोगों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सामाजिक आयोजन भी साबित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन पारंपरिक वैवाहिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में आपसी विश्वास और सहयोग को भी बढ़ाते हैं।








