बोकारो में ऐतिहासिक कार्रवाई: पूरे थाना के 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड, पुष्पा केस में पुलिस की भूमिका पर सवाल
SIT की जांच में खुलासा, 8 महीने से दबे केस में आरोपी गिरफ्तार, जंगल से मिला कंकाल
रिपोर्ट : नीरज सिंह/ कुमार अमित
रांची/बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले से सामने आई एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिंडराजोरा थाना के प्रभारी से लेकर सिपाही तक कुल 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई झारखंड पुलिस के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही है।
मामला क्या है?
पूरा मामला खूंटाडीह गांव की रहने वाली 18 वर्षीय युवती पुष्पा महतो के अपहरण और हत्या से जुड़ा है। 21 जुलाई 2025 को पुष्पा अचानक लापता हो गई थी। इसके बाद 24 जुलाई को उसकी मां रेखा देवी ने पिंडराजोरा थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने शुरू से ही गांव के ही दिनेश महतो पर शक जताया था, लेकिन पुलिस ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यही नहीं, आरोप यह भी है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस ने केस दर्ज करने में भी ढिलाई बरती।

पुलिस पर गंभीर आरोप
जांच के दौरान जो बातें सामने आईं, उन्होंने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया। पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर केस को कमजोर किया, अभियुक्तों के साथ सांठगांठ और संपर्क बनाए रखा,मामले को दबाने के लिए कथित रूप से पैसे का लेन-देन हुआ,यहां तक कि आरोपियों के साथ पार्टी करने तक की बातें सामने आईं, इन आरोपों के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या पुलिस अपराधियों को बचाने में लगी थी?
हाईकोर्ट की दखल के बाद बदली तस्वीर
जब लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया। बोकारो एसपी को सशरीर कोर्ट में पेश होना पड़ा वहीं डीजीपी को भी वर्चुअल माध्यम से जवाब देना पड़ा था. यहीं से पूरे मामले में तेजी आई।
SIT का गठन और बड़ा खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक SIT टीम का गठन किया गया। SIT ने महज एक दिन में मुख्य आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार किया, उसकी निशानदेही पर मधुडीह जंगल से पुष्पा का कंकाल बरामद किया और हत्या में इस्तेमाल चाकू और कपड़े भी बरामद किए.आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने 21 जुलाई को ही पुष्पा की हत्या कर दी थी और शव को जंगल में छुपा दिया था।

28 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
SIT की रिपोर्ट और जांच के आधार पर बोकारो एसपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 सब इंस्पेक्टर, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाही कुल 28 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है ।
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
यह पूरा मामला बोकारो पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है. सवाल उठा रहा की क्या पुलिस जानबूझकर केस दबा रही थी? क्या अपराधियों को सिस्टम के अंदर से संरक्षण मिल रहा था? अगर हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता तो क्या सच सामने आता?
मां की लड़ाई बनी मिसाल
इस लड़ाई में पुष्पा की मां रेखा देवी ने हार नहीं मानी और लगातार न्याय के लिए लड़ती रहीं। उनकी दृढ़ता और संघर्ष ने ही इस पूरे मामले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बोकारो का यह मामला सिर्फ एक हत्या या अपहरण का केस नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल है। जहां एक तरफ पुलिस पर गंभीर आरोप लगे, वहीं दूसरी ओर न्यायिक हस्तक्षेप और SIT की कार्रवाई ने सच्चाई को सामने ला दिया। अब देखना होगा कि इस मामले में दोषियों को कितनी सख्त सजा मिलती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।








