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डीएवी नंदराज में एरोबिक एक्सरसाइज का प्रदर्शन: छात्रों ने दिया फिटनेस और स्वास्थ्य का संदेश

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रांची: राजधानी रांची के डी.ए.वी. नंदराज पब्लिक स्कूल में शनिवार को आयोजित प्रातःकालीन सभा के दौरान छात्रों ने एरोबिक एक्सरसाइज का शानदार प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और फिटनेस के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया।

छात्रों ने दिखाया ऊर्जा और तालमेल
कार्यक्रम में विद्यालय के चारों हाउस के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामूहिक रूप से एरोबिक एक्सरसाइज का प्रदर्शन किया। संगीत की धुन पर किए गए इस अभ्यास में बच्चों की ऊर्जा, तालमेल और अनुशासन देखने लायक था। पूरे कार्यक्रम ने विद्यालय परिसर में एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण का निर्माण किया।

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“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ विचार” — प्राचार्य
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन में ही स्वस्थ विचारों का निवास होता है। उन्होंने बताया कि एरोबिक एक्सरसाइज एक उच्च ऊर्जा वाला व्यायाम है, जिसे संगीत के साथ किया जाता है और यह शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है।

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एरोबिक एक्सरसाइज का इतिहास और महत्व
प्राचार्य ने अपने संबोधन में बताया कि एरोबिक एक्सरसाइज की शुरुआत 1990 के दशक में कोलंबिया में एक ट्रेनर द्वारा की गई थी, जो आज पूरी दुनिया में फिटनेस के एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में मोटापा, ध्यान की कमी और शारीरिक निष्क्रियता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें इस तरह के व्यायाम के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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नई शिक्षा नीति और स्वास्थ्य जागरूकता
उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में भी बच्चों के समग्र विकास के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालय का यह प्रयास उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जिसमें बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी आदतें भी सिखाई जा रही हैं।

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जंक फूड से दूरी की सलाह
प्राचार्य ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को फास्ट फूड और पैक्ड फूड से दूर रखें और घर में ही पौष्टिक भोजन को बढ़ावा दें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि माता-पिता स्वयं शारीरिक व्यायाम की पहल करें, ताकि बच्चे भी उन्हें देखकर प्रेरित हों और नियमित रूप से व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

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परंपरा और आधुनिकता का संगम
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्राचीन भारत में भी शारीरिक व्यायाम की समृद्ध परंपरा रही है, जैसे हनुमान दंड और शिव नृत्य, जो आज के आधुनिक फिटनेस अभ्यासों से जुड़े हुए हैं। इस प्रकार एरोबिक एक्सरसाइज आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों का समन्वय प्रस्तुत करती है।

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छात्रों में फिटनेस के प्रति जागरूकता
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। विद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आयोजन बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनकी मानसिक क्षमता को भी मजबूत करते हैं।

डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल का यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के समग्र विकास पर केंद्रित है। इस तरह के प्रयास बच्चों में स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच के बीज बोते हैं, जो उनके भविष्य को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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