झारखंड में नक्सल मुक्त अभियान को नया हथियार: खेल और रोजगार से जुड़ेंगे युवा
बस्तर ओलंपिक मॉडल पर पहल, खेल के जरिए भटकाव रोकने की तैयारी
मुनादी लाइव : रांची से एक अहम पहल सामने आई है, जहां नक्सल प्रभावित इलाकों को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने के लिए अब युवाओं को खेल और रोजगार से जोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसकी शुरुआत खेल गतिविधियों से की जा रही है और इसके लिए छत्तीसगढ़ के सफल ‘बस्तर ओलंपिक’ मॉडल को आधार बनाया गया है।
डीजीपी-आईजी कॉन्फ्रेंस में बनी रणनीति
यह फैसला हाल ही में नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित डीजीपी/आईजी कॉन्फ्रेंस में लिया गया था। इसमें नक्सल प्रभावित राज्यों में युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खेल, शिक्षा और रोजगार आधारित मॉडल अपनाने पर जोर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय और पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो (BPRD) के निर्देश के बाद अब झारखंड पुलिस इस दिशा में सक्रिय हो गई है।
नोडल अफसर की नियुक्ति
इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए झारखंड जगुआर की डीआईजी इंद्रजीत महता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में खेल प्रतियोगिताओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
क्यों खास है बस्तर ओलंपिक मॉडल?
छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साल 2025 में आयोजित इस प्रतियोगिता में करीब 700 ऐसे युवाओं ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की।
इस मॉडल की सफलता को देखते हुए अब इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा मिल सके।
झारखंड में क्या है स्थिति?
हालांकि देश को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन झारखंड के कुछ इलाके अब भी संवेदनशील माने जाते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार चाईबासा अब भी नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल है, जबकि बोकारो, चतरा और लातेहार को ‘लिगेसी और थ्रेट’ श्रेणी में रखा गया है।
रणनीति में बड़ा बदलाव
अब पुलिस की रणनीति सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘जनसंपर्क और विकास’ पर फोकस किया जाएगा। युवाओं को खेल प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शैक्षिक भ्रमण के जरिए जोड़ा जाएगा। इस पहल के तहत ब्लॉक और जिला स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़े और उन्हें भटकाव से दूर रखा जा सके।
विकास से जुड़ेगा भरोसा
सरकार की योजना है कि इन इलाकों में विकासोन्मुख अधिकारियों की तैनाती की जाए और युवाओं को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए भ्रमण कार्यक्रम भी चलाए जाएं। इससे उनमें राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव और विश्वास की भावना मजबूत होगी।
यह पहल न केवल नक्सलवाद के खिलाफ एक नई रणनीति है, बल्कि यह युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और समाज में स्थायी बदलाव लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








