“पेपर लीक नहीं, ठगी का खेल!” — JSSC और रांची पुलिस का दावा, 159 अभ्यर्थी हिरासत में

JSCCL Solver Gang

अभ्यर्थियों से 15 लाख की ठगी, सॉल्वर गैंग गिरफ्तार

रांची: झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर मचे हड़कंप के बीच आखिरकार बड़ा खुलासा हुआ है। पेपर लीक की चर्चाओं के बीच झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और रांची पुलिस ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया कि परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ था, बल्कि अभ्यर्थियों को ठगी का शिकार बनाया गया। लेकिन इस खुलासे के साथ ही कई बड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं, क्या यह सिर्फ ठगी का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क? 159 अभ्यर्थी एक साथ कैसे फंस गए? और क्या यह पहले हुए JSSC CGL विवाद की पुनरावृत्ति है?

159 अभ्यर्थी हिरासत में, सॉल्वर गैंग गिरफ्तार
रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र में कुछ लोग परीक्षा का पेपर लीक कराने का दावा कर रहे हैं और अभ्यर्थियों को प्रश्न रटवाए जा रहे हैं। सूचना के बाद कई थानों की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक भवन पर छापेमारी की, जहां से 159 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही 5 शातिर सॉल्वर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं।

“15 लाख में पेपर” — बेरोजगारी पर बना धंधा
जांच में सामने आया है कि सॉल्वर गैंग अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये तक वसूलने की योजना बना रहा था। यानी बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की होड़ को इस गिरोह ने कमाई का जरिया बना लिया था। “पेपर दिलवा देंगे…” … “सवाल पहले से रटवा देंगे…” ऐसे झूठे वादों में फंसाकर अभ्यर्थियों को जाल में फंसाया जा रहा था।

JSSC का दावा — “कदाचार मुक्त हुई परीक्षा”
JSSC के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उत्पाद सिपाही परीक्षा पूरी तरह कदाचार मुक्त सम्पन्न हुई है, पेपर लीक का कोई प्रमाण नहीं मिला है. उन्होंने साफ कहा कि कुछ लोगों ने अभ्यर्थियों को गुमराह कर पैसे की ठगी की है और आयोग ऐसे अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा।

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अभ्यर्थियों पर भी गिरेगी गाज
इस मामले में सिर्फ सॉल्वर गैंग ही नहीं, बल्कि फंसे हुए अभ्यर्थियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। JSSC ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को आजीवन डिबार किया जाएगा, भविष्य में किसी भी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी यानी नौकरी पाने के शॉर्टकट की कोशिश अब पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।

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“रटाया गया पेपर, लेकिन मैच नहीं हुआ”
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अभ्यर्थियों को जो प्रश्न रटवाए जा रहे थे, वे असली परीक्षा के प्रश्नों से मेल नहीं खाते थे। यानी पूरा खेल फर्जी था, अभ्यर्थियों को सिर्फ भ्रम में रखा गया.

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बड़ा सवाल — क्या सिस्टम पूरी तरह साफ है?
हालांकि JSSC और पुलिस ने पेपर लीक से इनकार किया है, लेकिन सवाल अभी भी कायम हैं कि इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी एक जगह कैसे इकट्ठा हुए? क्या यह नेटवर्क पहले से सक्रिय था? क्या पहले हुए पेपर लीक मामलों से कोई सबक लिया गया? झारखंड में पहले भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद होते रहे हैं, जिससे अभ्यर्थियों का भरोसा पहले से ही कमजोर है।

JSSC CGL की याद क्यों आई?
इस पूरे मामले में खुद अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि यह modus operandi पहले हुए JSSC CGL विवाद जैसा है। यानी पैटर्न वही, तरीका वही, सिर्फ नाम बदला, घटना साबित करती है कि सॉल्वर गैंग अब भी सक्रिय हैं और बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे हैं।

बेरोजगारी और लालच — खतरनाक कॉम्बिनेशन
यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी भी है। बढ़ती बेरोजगारी,कठिन होती जा रही प्रतियोगिता परीक्षा , इसी का फायदा उठाकर ठग सक्रिय हो गए है , कुछ अभ्यर्थी तो आसान रास्ता अपनाने की कोशिश में खुद जाल में फंस जाते हैं । रांची के इस मामले से इतना तो साफ़ है कि हर “पेपर लीक” की खबर सच नहीं होती लेकिन हर बार सिस्टम भी पूरी तरह निर्दोष भी नहीं होता। यह घटना एक तरफ जहां सॉल्वर गैंग की साजिश को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर यह भी बताती है कि सिस्टम में भरोसा कमजोर होने पर अफवाहें कितनी तेजी से फैलती हैं।

अब असली चुनौती है, दोषियों को सख्त सजा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, ताकि भविष्य में न कोई अभ्यर्थी ठगा जाए…और न ही मेहनत करने वालों का भरोसा टूटे।

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