झारखंड

झारखंड: शहीदों की धरती या राजनीति का सगूफ़ा?

लेखक: हिमांशु कुमार(झारखंड आंदोलनकारी, पूर्व आजसू नेता) रांची : “झारखंड शहीदों की धरती है” — यह वाक्य हर राजनीतिक भाषण की शुरुआत में सुनाई देता है। सिद्धो-कान्हो, बिरसा मुंडा, शेख भिखारी, नीलांबर-पीतांबर, निर्मल महतो से लेकर बबलू मुर्मू और सुनील महतो तक, ये नाम हर दल के पोस्टरों पर तो दिख जाते हैं, लेकिन उनके…

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