US-ईरान वार्ता फेल: होर्मुज संकट से तेल, LPG, सोना-चांदी और शेयर बाजार पर असर
मुनादी लाइव : दुनिया एक बार फिर बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और चिंता का माहौल गहरा गया है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में करीब 21 घंटे तक चली बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
इस वार्ता में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से अब्बास अराघची ने मोर्चा संभाला। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और न्यूक्लियर प्रोग्राम जैसे अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे बातचीत पूरी तरह विफल हो गई।
क्यों इतना अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग पर कोई बाधा आती है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इस मार्ग को अंतरराष्ट्रीय उपयोग के लिए पूरी तरह खुला रखने के पक्ष में है। यही टकराव दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।
शेयर बाजार में ‘ब्लैक मंडे’ का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा सकती है। निवेशक जोखिम से बचने के लिए अपने पैसे को सुरक्षित निवेश विकल्पों में स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे बाजार में अचानक गिरावट यानी ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति बन सकती है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में पहले से ही अस्थिरता के संकेत मिलने लगे हैं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
तेल और LPG पर सीधा असर
होर्मुज संकट का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। अगर इस मार्ग से तेल की सप्लाई बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आना तय है। भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर काफी निर्भर हैं, वहां पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
सोना-चांदी में क्यों आ रही तेजी?
ऐसे वैश्विक संकट के समय निवेशक पारंपरिक रूप से सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिसमें सोना और चांदी सबसे प्रमुख हैं। यही कारण है कि इनकी मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी देखी जा रही है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो सोने-चांदी की कीमतें और ऊंचाई छू सकती हैं, जिससे निवेशकों को फायदा तो होगा, लेकिन आम खरीदारों के लिए यह महंगा सौदा बन सकता है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत होगी या स्थिति और बिगड़कर संघर्ष की ओर बढ़ेगी। अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ऊर्जा संकट, महंगाई और बाजार में अस्थिरता—ये तीनों मिलकर आने वाले दिनों में दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।








