बोकारो ट्रेजरी घोटाले में बड़ा खुलासा: 3.15 करोड़ से बढ़कर 4.29 करोड़ निकासी, अकाउंटेंट गिरफ्तार

Bokaro Treasury Scam

रिपोर्ट: नीरज सिंह
बोकारो/झारखंड:
झारखंड के बोकारो ट्रेजरी से जुड़े फर्जी निकासी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में जहां 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी सामने आई थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार रुपये से अधिक हो गया है। इस मामले में बोकारो पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार को आरोपी अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

63 बार में 4.29 करोड़ की निकासी
बोकारो एसपी हरविंदर सिंह के अनुसार, विभागीय जांच में यह सामने आया है कि आरोपी द्वारा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कुल 63 बार ट्रांजैक्शन कर ₹4.29 करोड़ से अधिक की राशि निकाली गई। यह निकासी एक रिटायर्ड हवलदार उपेंद्र सिंह के नाम का दुरुपयोग कर की गई है ।

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पोर्टल से छेड़छाड़, बदली गई जन्मतिथि और अकाउंट
जांच में यह भी बड़ा खुलासा हुआ कि आरोपी ने सरकारी पोर्टल में जन्म तिथि (DOB) बदली, बैंक अकाउंट नंबर में हेरफेर किया और फर्जी तरीके से वेतन निकासी की प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह केवल साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि सिस्टम के साथ सुनियोजित छेड़छाड़ थी।

पत्नी के खाते में ट्रांसफर की गई रकम
पूछताछ के दौरान आरोपी कौशल कुमार पांडे ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। उसने बताया कि निकाली गई पूरी राशि अपनी पत्नी अनु पांडेय के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है। अब पुलिस इस पैसे के उपयोग और ट्रांजैक्शन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है।

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केस दर्ज, आरोपी जेल भेजा गया
इस मामले में बीएस सिटी थाना में कांड संख्या 62/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही, इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी गहनता से जांच की जा रही है।

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क्या और लोग भी शामिल हैं?
पुलिस का मानना है कि इतनी बड़ी रकम की निकासी अकेले संभव नहीं है, इसमें अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भी बड़ी भूमिका हो सकती है। इस मामले में अब जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।

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प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी ट्रेजरी सिस्टम और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठता है की इतने लंबे समय तक फर्जी निकासी कैसे होती रही? ऑडिट में यह गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ी गई? सिस्टम में सुरक्षा खामियां कहां हैं? आला अधिकारियो को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

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राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मामले को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है । पूर्व सांसद सूरज मंडल ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की भी मांग करते हुए कहा कि पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है। निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी जरूरी है, बिना बड़े अधिकारियो के मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है.

“घोटाले की रकम और बढ़ सकती है”
सूरज मंडल ने यह भी आशंका जताई कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की राशि और निश्चित रूप से बढ़ सकती है और इसमें कई स्तरों पर लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है.

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आगे क्या?
अब इस मामले में आगे की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। मुख्य सवाल यह हैं कि क्या यह संगठित नेटवर्क है? और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं? क्या अन्य जिलों में भी ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ है?

बोकारो ट्रेजरी घोटाला अब एक बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में सामने आ रहा है, जिसमें हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद भी जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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