बोकारो वन भूमि घोटाला: छोटे कर्मचारी से बड़े बिल्डर तक, CID जांच में बड़ा खुलासा
फर्जी कागजात से 117 एकड़ जमीन की बिक्री, करोड़ों का खेल, कई बड़े नाम घेरे में
मुनादी लाइव : बोकारो में हुए बहुचर्चित वन भूमि घोटाले की CID जांच में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। इस घोटाले में अब यह साफ हो रहा है कि इसमें सिर्फ छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बड़े बिल्डर और प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि वन भूमि पर कब्जा जमाने के लिए बिल्डरों के पैसों का इस्तेमाल किया गया। घोटाले के मुख्य आरोपी इजहार और अख्तर हुसैन ने एक बिल्डर के वित्तीय सहयोग से राजस्व विभाग के हल्का कर्मचारियों की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए।
CID रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011 में जमीन कारोबारी शैलेश के साथ इनकी सांठगांठ हुई, जिसके बाद पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। फर्जी कागजात तैयार होने के बाद करीब 74 करोड़ रुपये में यह जमीन उमयुष मल्टीकॉम नामक कंपनी को बेच दी गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि उमयुष मल्टीकॉम कंपनी शैलेश के बेटे के नाम पर थी और जमीन खरीद के समय इसकी वैल्यू मात्र एक लाख रुपये थी। इसके बावजूद इस कंपनी के जरिए करोड़ों का लेन-देन किया गया। इसी कंपनी से जमीन खरीदने के लिए राजबीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक विमल अग्रवाल ने 3.40 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
CID द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे में विमल अग्रवाल को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। मामले में विमल अग्रवाल और पुनीत अग्रवाल के बाद अब तीसरे निदेशक वीर अग्रवाल को भी आरोपी बनाया गया है।
दरअसल, बोकारो के तेतुलिया क्षेत्र में 117 एकड़ से अधिक वन भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचा गया। यह जमीन पहले बोकारो स्टील प्लांट द्वारा वन विभाग को लौटाई गई थी, लेकिन हैंडओवर प्रक्रिया में गड़बड़ी का फायदा उठाकर भूमाफियाओं ने बड़ा खेल कर दिया।
इस घोटाले में कई अंचल कर्मियों, भूमाफियाओं और बोकारो स्टील प्लांट के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और कई लोगों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
जांच के दौरान अनुराग गुप्ता के निर्देश पर इस केस को CID को सौंपा गया था। CID ने सेक्टर-12 थाना में दर्ज कांड संख्या 32/2024 को टेकओवर कर जांच शुरू की थी।
अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस घोटाले से जुड़े बड़े नाम सामने आने की संभावना भी बढ़ती जा रही है। यह मामला झारखंड के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक माना जा रहा है।








