रूस में गहराता लेबर संकट, भारतीयों के लिए खुले रोजगार के नए द्वार
नई दिल्ली/मॉस्को: रूस इस समय एक गंभीर लेबर संकट से जूझ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े वैश्विक प्रतिबंधों के कारण वहां की अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर सीधा असर पड़ा है। बड़ी संख्या में युवा आबादी के युद्ध में शामिल होने, पलायन और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के चलते रूस को अब काम करने वाले लोगों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी कमी को पूरा करने के लिए रूस अब भारत जैसे देशों की ओर रुख कर रहा है। इसका ताजा संकेत तब मिला जब भारत में रूस के राजदूत डेनिस एलीपोव ने भारतीय कामगारों को लेकर बड़ा बयान दिया।
रूस में 70,000 से ज्यादा भारतीय कर रहे हैं काम
रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में डेनिस एलीपोव ने कहा कि फिलहाल रूस में 70,000 से अधिक भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं, और यह संख्या आने वाले समय में और बढ़ने वाली है।
उन्होंने कहा,
“जैसे-जैसे दोनों देशों की बिजनेस कम्युनिटी के बीच आपसी रुचि बढ़ेगी और हुए समझौतों को ज़मीन पर लागू किया जाएगा, वैसे-वैसे रूस में काम करने वाले भारतीयों की संख्या भी बढ़ेगी।”
राजदूत के अनुसार, इससे केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच मानवीय और व्यावसायिक रिश्ते भी और गहरे होंगे।
युद्ध और प्रतिबंधों ने बढ़ाई समस्या
रूस का यह लेबर संकट मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का नतीजा है। बड़ी संख्या में पुरुष आबादी सेना में शामिल होना, कुशल श्रमिकों का अन्य देशों में पलायन करना, उद्योगों, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में मजदूरों की भारी कमी इन परिस्थितियों में रूस को विदेशी श्रमिकों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
भारत के लिए अवसरों की नई खिड़की
भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े स्किल्ड वर्कफोर्स सप्लायर देशों में शामिल है। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप और अमेरिका तक बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं। रूस में बढ़ती मांग से भारत के लिए इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, आईटी और टेक्निकल सेक्टर, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में नए रोजगार अवसर खुलने की संभावना है।
मजबूत होते भारत-रूस संबंध
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ लेबर माइग्रेशन का मामला नहीं है, बल्कि भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का एक नया आयाम है। जहां एक ओर रूस को कामगार मिलेंगे, वहीं भारत के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बेहतर आमदनी का अवसर मिलेगा।
रूस का लेबर संकट भारत के लिए एक आर्थिक अवसर बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में अगर द्विपक्षीय समझौते और तेज़ी से लागू होते हैं, तो रूस भारतीय कामगारों के लिए एक बड़ा डेस्टिनेशन बन सकता है।








