CBSE का बड़ा फैसला: कक्षा 10वीं की पहली बोर्ड परीक्षा अनिवार्य, नहीं तो नहीं मिलेगा दूसरा मौका

CBSE Board Exam

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए बड़ा निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने कहा है कि जो छात्र पहले चरण की परीक्षा में कम से कम तीन विषयों में उपस्थित नहीं होंगे, उन्हें “अनिवार्य पुनरावृत्ति” श्रेणी में रखा जाएगा और वे दूसरी बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।

सीबीएसई 2026 से कक्षा 10वीं के लिए दो बोर्ड परीक्षाओं की नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। बोर्ड का यह स्पष्टीकरण उन अनुरोधों के बाद आया है, जिनमें कुछ छात्रों को पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने की स्थिति में दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

परीक्षा नियंत्रक ने साफ किया नियम
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि सभी छात्रों के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि उत्तीर्ण और पात्र छात्रों को विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं में से किसी भी तीन विषयों में अपने प्रदर्शन को सुधारने का अवसर दिया जाएगा।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों में अनुपस्थित रहता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। ऐसे छात्रों को अगले वर्ष फरवरी में आयोजित मुख्य परीक्षा का इंतजार करना होगा।

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कंपार्टमेंट छात्रों को मिलेगा मौका
सीबीएसई ने यह भी बताया कि पहली परीक्षा में कंपार्टमेंट पाने वाले छात्र दूसरी परीक्षा में कंपार्टमेंट श्रेणी के तहत शामिल हो सकेंगे। हालांकि कक्षा 10वीं पास करने के बाद अतिरिक्त विषय लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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बोर्ड ने साफ कहा है कि यदि मुख्य परीक्षा में कोई छात्र तीन या अधिक विषयों में शामिल नहीं होता है, तो उसे नीति के तहत दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस संबंध में प्राप्त अनुरोधों पर विचार नहीं किया जाएगा।

NEP 2020 के तहत लागू हो रहा नया सिस्टम
गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने की सिफारिश की गई है, ताकि छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम हो और कोचिंग पर निर्भरता घटे। इस साल कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं मंगलवार से शुरू हो रही हैं, जिसमें भारत और विदेश से 46 लाख से अधिक छात्र शामिल होंगे।

सीबीएसई के इस नए नियम के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि अब पहली परीक्षा में शामिल होना ही आगे की रणनीति तय करेगा।

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