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हजारीबाग पत्रकार मारपीट कांड पर बोकारो में उबाल: मंत्री इरफान अंसारी मंत्री से माफी की मांग पर अड़े पत्रकार

Journalist Protest

हजारीबाग घटना के बाद पूरे राज्य में आक्रोश

अब सड़कों पर उतरने की तैयारी

बोकारो: हजारीबाग में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट की घटना ने अब पूरे झारखंड में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस घटना को लेकर राज्यभर के पत्रकारों में गहरी नाराजगी है और इसी क्रम में बोकारो के पत्रकारों ने भी खुलकर विरोध दर्ज कराया है। पत्रकारों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए साफ संकेत दिया है कि अब यह मामला शांत नहीं होने वाला।

सर्किट हाउस में बैठक, आंदोलन का ऐलान
इस मुद्दे को लेकर बोकारो सर्किट हाउस में पत्रकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस घटना के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक घटना का विरोध नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सुरक्षा की लड़ाई है।

2 मई को काला बिल्ला और प्रोटेस्ट मार्च
आंदोलन के पहले चरण के तहत 2 मई को सभी पत्रकार काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही शहर में एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला जाएगा, जो डीसी कार्यालय तक जाएगा। मार्च के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें पत्रकारों की सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

प्रमुख मांगें: सुरक्षा कानून से लेकर कार्रवाई तक
पत्रकारों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है:

  • पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए
  • पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए
  • हजारीबाग घटना के सभी आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई हो
  • मंत्री इरफान अंसारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें
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“सवाल पूछना अपराध नहीं”
पत्रकारों ने कहा कि मीडिया का काम समाज के मुद्दों को उठाना और सत्ता से सवाल करना है। हजारीबाग की घटना में भी पत्रकार केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन उनके साथ हिंसक व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने दो टूक कहा कि सवाल पूछना अपराध नहीं है और इसे दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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बढ़ता आक्रोश, आंदोलन तेज होने के संकेत
पत्रकारों का कहना है कि अगर प्रशासन और सरकार इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। संकेत दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में यह विरोध राज्यव्यापी रूप ले सकता है।

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लोकतंत्र और मीडिया की भूमिका पर सवाल
यह घटना केवल एक हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सवाल खड़ा करने वाली घटना के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं होंगे, तो निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता पर गंभीर असर पड़ेगा।

बोकारो में पत्रकारों का यह आंदोलन इशारा है कि अब मीडिया समुदाय अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एकजुट हो रहा है। हजारीबाग की घटना ने एक चिंगारी का काम किया है, जो अब पूरे राज्य में विरोध की आग बनती जा रही है।
अब देखना यह अहम होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है—क्या पत्रकारों को न्याय मिलेगा या यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।

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